भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत खिलाड़ियों की जब भी बात होगी तो अजिंक्य रहाणे का नाम जरूर लिया जाएगा. अजिंक्य रहाणे के संन्यास के बाद पूर्व दिग्गज भारतीय सुनील गावस्कर ने उनकी जमकर तारीफ की है.
सुनील गावस्कर ने मिड-डे में लिखे कॉलम में कहा कि अजिंक्य रहाणे ने बतौर कप्तान और बल्लेबाज भारतीय टीम के लिए जो भी किया उनको उसका हक कभी नहीं मिला. उन्होंने रहाणे की तुलना महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ से करते हुए भारतीय क्रिकेट कल्चर पर भी बड़ा सवाल उठाया है.
सुनील गावस्कर ने लिखा कि राहणे का बतौर टेस्ट कप्तान रिकॉर्ड शानदार रहा है. उन्होंने 6 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिनमें से 4 में जीत दर्ज की और एक भी मैच नहीं हारा. इसके बावजूद उनकी कप्तानी की वह सराहना नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी.
जीत के बाद नहीं होती कप्तानों की तारीफ
गावस्कर ने कहा कि राहुल द्रविड़ की ही तरह जिनकी कप्तानी में भारत ने कई शानदार जीत दर्ज कीं लेकिन उन्हें श्रेय नहीं मिला. रहाणे की लीडरशिप को भी कभी वो तालियां नहीं मिलीं जो मिलनी चाहिए थीं. यह भारतीय क्रिकेट का तरीका रहा है. जब टीम जीतती है तो तारीफें व्यक्तिगत प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मिलती हैं, लेकिन जब टीम हारती है तो सारा दोष कप्तान और कोच के सिर मढ़ दिया जाता है.
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रहाणे की कप्तानी में गाबा में भारत ने रचा इतिहास
साल 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को याद करते हुए गावस्कर ने बताया कि कैसे एडिलेड में 36 रन पर सिमटने के बाद रहाणे ने डूबते हुए जहाज को संभाला था. विराट कोहली के अपने पहले बच्चे के जन्म के कारण भारत लौटने के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न में शानदार शतक जड़कर वापसी की नींव रखी. तमाम बड़े खिलाड़ियों के चोटिल होने के बावजूद रहाणे ने युवा खिलाड़ियों में जोश भरा और ऑस्ट्रेलिया के अभेद्य किले 'द गाबा' में भारत को यादगार जीत दिलाकर सीरीज 2-1 से अपने नाम की.
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मैदान पर नहीं बनाया कोई दुश्मन
गावस्कर ने आगे लिखा कि रहाणे उन खिलाड़ियों में से हैं जिनका पूरे करियर में एक भी दुश्मन नहीं रहा. रहाणे अपना सिर ऊंचा रखकर क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं. दुनिया में शायद 10-12 से भी कम ऐसे खिलाड़ी होंगे जिन्होंने अपने करियर में एक भी दुश्मन न बनाया हो.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क