‘दादा, कप्तानी छोड़ दो...’, भज्जी-युवराज ने रचा था गांगुली के खिलाफ पूरा ड्रामा, द्रविड़ भी थे 'साजिश' में शामिल

पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सौरव गांगुली की कप्तानी के दौर का मजेदार किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि युवराज सिंह और उन्होंने गांगुली को अप्रैल फूल बनाने के लिए अखबार की फर्जी कटिंग तैयार की थी...

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भज्जी ने खोला गांगुली की कप्तानी के दौर का मजेदार राज. (Photo, ITG) भज्जी ने खोला गांगुली की कप्तानी के दौर का मजेदार राज. (Photo, ITG)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सौरव गांगुली की कप्तानी का दौर सिर्फ मैदान पर मिली कामयाबी के लिए याद नहीं किया जाता, बल्कि उस दौर के मजबूत और जीवंत ड्रेसिंग रूम की कहानियां भी आज तक चर्चा में रहती हैं. पूर्व भारतीय स्पिनर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने गांगुली की कप्तानी के दिनों का एक ऐसा किस्सा सुनाया है, जिसमें युवराज सिंह, राहुल द्रविड़ और खुद भज्जी ने मिलकर ‘दादा’ को अप्रैल फूल बनाने की पूरी साजिश रच डाली थी.

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हरभजन ने बताया कि वह खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें सौरव गांगुली जैसे कप्तान के नेतृत्व में खेलने का मौका मिला. उनके मुताबिक गांगुली सिर्फ कप्तान या टीम के सदस्य नहीं थे, बल्कि खिलाड़ियों के लिए बड़े भाई जैसे थे. यही वजह थी कि भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम परिवार जैसा महसूस होता था.

अखबार की फर्जी कटिंग और गांगुली को चौंकाने की साजिश

हरभजन ने बताया कि एक बार पूरी टीम साथ बैठी थी. तभी उन्होंने और युवराज सिंह ने गांगुली के साथ अप्रैल फूल का मजाक करने का फैसला किया.

दोनों ने मिलकर एक फर्जी अखबार की कटिंग तैयार की, जिसमें गांगुली के हवाले से ऐसी बात लिखी गई थी, जो उन्होंने वास्तव में कभी कही ही नहीं थी.

इसके बाद युवराज ने गांगुली से उस कथित बयान को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया. मजाक को असली दिखाने के लिए कुछ सीनियर खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया.

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हरभजन ने बताया कि उन्होंने भी गंभीर चेहरा बनाकर गांगुली को घेरना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा, ‘पाजी, आप ही बताइए... अगर आपने वाकई ऐसा किया है तो यह गलत है.’

मजाक को और विश्वसनीय बनाने के लिए राहुल द्रविड़ भी इसमें शामिल हो गए. द्रविड़ ने भी गंभीर होकर गांगुली से कहा कि अगर उन्होंने ऐसा किया है तो यह ठीक नहीं है.

द्रविड़ और भज्जी को देखकर गांगुली ने कहा- कप्तानी छोड़ दूंगा

जब दो सीनियर खिलाड़ी गांगुली को घेरने लगे तो वह पूरी तरह उलझ गए. हरभजन के मुताबिक गांगुली बार-बार सफाई देते रहे कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है.

गांगुली ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्होंने सच में ऐसा किया है तो वह कप्तानी छोड़ देंगे.

वह लगातार पूछ रहे थे कि आखिर उन्होंने यह बात कहां और कब कही है.

लेकिन पूरी टीम ने ऐसा माहौल बना दिया था कि गांगुली को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. खिलाड़ियों को इस ड्रामे को आगे बढ़ाने के लिए यहां तक करना था कि वे पढ़ाई करने, अपना सामान उठाने और वहां से जाने की तैयारी करने का नाटक करने लगे.

फिर आखिरकार जब मजाक का खुलासा हुआ तो गांगुली को पता चला कि पूरी कहानी बनाई गई थी.

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राज खुला तो गांगुली दौड़ पड़े

हरभजन ने बताया कि जैसे ही टीम ने अपना मजाक उजागर किया, गांगुली उनके पीछे दौड़ पड़े और कहने लगे- ‘रुको, तुम लोग क्या कर रहे हो?’

लेकिन गांगुली का गुस्सा ज्यादा देर नहीं चला. हरभजन के मुताबिक यही घटना बताती है कि वह किस तरह के कप्तान थे.

अगर कोई दूसरा कप्तान होता तो शायद वह इस हरकत पर बहुत ज्यादा नाराज होता, लेकिन गांगुली खिलाड़ियों के लिए इतने सहज थे कि ऐसी शरारत भी ड्रेसिंग रूम के रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाती थी.

‘दादा हमारे लिए बड़े भाई की तरह थे’

हरभजन ने गांगुली को याद करते हुए कहा कि वह उनके लिए सिर्फ कप्तान नहीं थे. वह बड़े भाई की तरह थे और एक बेहद अच्छे इंसान थे.

उनके मुताबिक गांगुली की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह थी कि उन्होंने ड्रेसिंग रूम को ऐसा माहौल दिया, जहां खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ खुलकर रह सकते थे, हंस सकते थे और मस्ती कर सकते थे.

हरभजन ने उस दौर के दूसरे सीनियर खिलाड़ियों को भी याद किया. उन्होंने कहा कि टीम के पास सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे महान खिलाड़ी थे. इसके अलावा अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण और जवागल श्रीनाथ जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने युवा खिलाड़ियों का ड्रेसिंग रूम में बहुत ख्याल रखा.

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जॉन राइट को भी नहीं बताया गया था राज

इस अप्रैल फूल वाले किस्से का सबसे मजेदार हिस्सा यह था कि तत्कालीन कोच जॉन राइट भी इस पूरे ड्रामे से अनजान थे.

हरभजन के मुताबिक जॉन राइट बाहर फील्डिंग सेशन शुरू कराने के लिए तैयार खड़े थे. उनके हाथ में कोन भी था, लेकिन अंदर भारतीय टीम का पूरा ड्रामा चल रहा था.

टीम ने उन्हें भी इस मामले से दूर रखा और कह दिया कि यह टीम का मामला है और वे इसे संभाल लेंगे.

उधर 15-20 मिनट गुजर गए, लेकिन खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम से बाहर ही नहीं निकले. जॉन राइट इंतजार करते रहे और अंदर टीम अप्रैल फूल के इस नाटक को निभाती रही.

भज्जी बोले- ड्रेसिंग रूम हमेशा गंभीर नहीं होना चाहिए

हरभजन के मुताबिक इस तरह की छोटी-छोटी घटनाएं टीम के खिलाड़ियों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं.

उन्होंने कहा कि क्रिकेट हो या कोई दूसरा खेल, ड्रेसिंग रूम का माहौल हमेशा गंभीर नहीं होना चाहिए. वहां मस्ती, खुशी और आपसी जुड़ाव भी जरूरी है.

उनके मुताबिक खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में जितने खुश रहेंगे, मैदान पर उतरकर उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे.

यही वजह है कि हरभजन के लिए गांगुली की कप्तानी का दौर सिर्फ आंकड़ों और जीत-हार का दौर नहीं है. वह उसे ऐसे ड्रेसिंग रूम के रूप में याद करते हैं, जहां कप्तान और खिलाड़ी के बीच की दूरी कम थी, सीनियर युवा खिलाड़ियों के साथ खड़े थे और टीम खुद को एक परिवार की तरह महसूस करती थी.

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और शायद इसी रिश्ते की सबसे मजेदार तस्वीर वह दिन था, जब भज्जी और युवराज ने दादा को कप्तानी छोड़ने तक की नौबत आने का नाटक कर दिया था और राहुल द्रविड़ भी इस ‘ऑपरेशन अप्रैल फूल’ में उनके साथ खड़े थे.

इनपुट: PTI

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