भारत ने गुवाहाटी में वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराकर 406 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया, शुभमन गिल ने नाबाद 223 रन ठोक दिए और मैच में कुल 811 रन बने. लेकिन इस पूरे रनफेस्ट से टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर खुश नहीं हैं. उन्होंने गुवाहाटी की पिच पर ही सवाल खड़े कर दिए.
गंभीर ने मैच के बाद ब्रॉडकास्टर से बातचीत में उन्होंने कहा- बैट और बॉल के बीच थोड़ा ज्यादा मुकाबला होना चाहिए. आप क्रिकेट की बात करते हैं, लेकिन यह क्रिकेट नहीं है, यह सिर्फ बैटिंग है.
दरअसल, पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 405 रन बनाए. भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी, लेकिन पावरप्ले में एक बार फिर गेंदबाज दबाव नहीं बना सके. जॉन कैम्पबेल और शाई होप ने 110 रन की साझेदारी की और बड़े स्कोर की नींव रखी. दोनों ने शतक लगाए, जबकि अमीर जंगू ने भी सेंचुरी जड़ दी.
वेस्टइंडीज 405 रन तक पहुंच गया, लेकिन पिच की बल्लेबाजी के लिए मदद और भारत की बैटिंग ताकत को देखते हुए यह स्कोर भी सुरक्षित नहीं लगा.
भारत की पारी में रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 26 ओवर में 255 रन जोड़ दिए. रोहित ने 101 रन बनाए. उनके आउट होने के बाद गिल ने मोर्चा संभाला और सिर्फ 133 गेंदों पर नाबाद 223 रन ठोककर भारत को 43.3 ओवर में लक्ष्य तक पहुंचा दिया.
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गंभीर ने कहा कि ऐसी पिच पर यंग बॉलर्स के लिए स्थिति मुश्किल हो जाती है. उनके मुताबिक विपक्षी टीम 400 बनाए और फिर भारत भी 400 का पीछा कर ले, तो रिकॉर्ड और दर्शकों के लिहाज से यह शानदार हो सकता है, लेकिन एक कोच और क्रिकेट फैन के तौर पर वह गेंदबाजों के लिए भी सोचते हैं.
उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्टर और दर्शकों के लिए बड़े स्कोर वाला मैच शानदार होता है, लेकिन क्रिकेट में गेंद और बल्ले के बीच संतुलन जरूरी है. गंभीर ने कहा कि ऐसी पिच पर गेंदबाजों के पास काम करने के लिए कुछ होना चाहिए.
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उन्होंने गेंदबाजों के आंकड़ों को लेकर भी एक अहम बात कही. गंभीर के मुताबिक कभी-कभी गेंदबाज के आंकड़े खराब दिखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसने खराब गेंदबाजी की है. ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाज को कुछ सहानुभूति और अतिरिक्त मार्जिन देना चाहिए.
गंभीर ने कहा कि कोचिंग स्टाफ को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि गेंदबाज ने अपनी गेंदबाजी और प्लान को सही तरीके से लागू किया या नहीं. सिर्फ आंकड़ों को देखकर गेंदबाजों पर ज्यादा सख्ती करना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे युवा गेंदबाजों को तैयार करना मुश्किल हो सकता है.
आकिब नबी के लिए क्या बोले गौतम गंभीर
डेब्यू कर रहे आकिब नबी का उदाहरण देते हुए गंभीर ने कहा कि उन्होंने अपने पहले मैच में 8.5 ओवर में 84 रन दिए और कोई विकेट नहीं लिया, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में उन्हें सपोर्ट की जरूरत है. उनके मुताबिक उस दिन किसी भी गेंदबाज के लिए ज्यादा कुछ नहीं था.
गंभीर ने यह भी बताया कि आकिब नबी को डेब्यू देने के पीछे सोच क्या थी. टीम उन्हें अगले मैच में भी मौका दे सकती थी, लेकिन तब सीरीज का नतीजा तय हो चुका होता. गंभीर के मुताबिक सीरीज जीतने के दबाव में उन्हें मौका देना ज्यादा उपयोगी था, क्योंकि वर्ल्ड कप भी दबाव का खेल है.
गुरनूर बरार पर क्या बोले हेड कोच गंभीर
गंभीर ने मैच के बाद बरार का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में पहले 10 ओवर और डेथ में गेंदबाजी करने का अनुभव खिलाड़ियों के लिए ज्यादा फायदेमंद है. सिर्फ आसान परिस्थितियों में अच्छे आंकड़े हासिल करना उतना उपयोगी नहीं होगा.
गुवाहाटी में भारत की जीत के साथ सीरीज में 2-0 की बढ़त हो गई है, लेकिन 811 रन वाले इस मुकाबले के बाद गंभीर ने साफ कर दिया कि सिर्फ रनों की बारिश उन्हें प्रभावित नहीं करती. उनकी नजर क्रिकेट में बैट और बॉल के बीच मुकाबले पर है. यानी साफ है कि उन्होंने बरसापारा स्टेडियम की पिच पर जीत के बाद भी सवाल खड़े कर दिए हैं, वैसे उनकी यह बात वाजिब भी है कि क्योंकि क्रिकेट केवल बल्लेबाजी भर का खेलना नहीं है, यहां गेंदबाजों को भी भरपूर मौके मिलने चाहिए.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क