'CAP नंबर 278 साइनिंग ऑफ...' मेलबर्न का हीरो, लॉर्ड्स का शतकवीर और करोड़ों दिलों का चैम्पियन... अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास का ऐलान कर दिया. 38 साल की उम्र में 'कैप नंबर 278' ने भावुक संदेश के साथ अपने 20 साल लंबे सफर को विराम दिया. मेलबर्न टेस्ट के ऐतिहासिक शतक, 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीत, लॉर्ड्स की यादगार पारी और भारतीय क्रिकेट में उनके शांत... लेकिन प्रभावशाली योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.

Advertisement
ऑस्ट्रेलिया फतह का नायक अब विदा... (Photo, Getty) ऑस्ट्रेलिया फतह का नायक अब विदा... (Photo, Getty)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:28 AM IST

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास का ऐलान कर दिया. 38 साल 54 दिन की उम्र में रहाणे ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा, 'Thank you for all the love and support over the years. Forever grateful.' इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे दौर का अंत हो गया, जिसमें शोर कम था, लेकिन प्रदर्शन और जिम्मेदारी सबसे आगे थी.

Advertisement

आखिर में शब्द कम पड़ गए. बड़े भारी मन से रहाणे ने सिर्फ इतना कहा, 'Cap No. 278 signing off.'

'हर शुरुआत का अंत होता है... अब आगे बढ़ने का समय'

रहाणे ने अपने संदेश में साफ किया कि यह फैसला किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि सही समय पर लिया गया स्वाभाविक निर्णय है. उन्होंने कहा  कि जीवन की सच्चाई यही है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और उन्हें लगा कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है.

उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि डोंबिवली से मुंबई जाकर क्रिकेट खेलने वाले एक छोटे लड़के का सपना सिर्फ भारत की कैप पहनना था. वह सपना पूरा हुआ और उन्होंने हर दिन, हर पारी और हर मौके पर देश के लिए अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश की.

Advertisement

रहाणे ने कहा कि उन्होंने हमेशा टीम और देश को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखा. प्रथम श्रेणी क्रिकेट से लेकर भारतीय टीम तक के करीब 20 वर्षों के सफर को उन्होंने गर्व की बात बताया और कहा कि भारतीय क्रिकेट की तरक्की का हिस्सा बनना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान रहा.

उन्होंने यह भी कहा कि संन्यास के बाद क्रिकेट से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा. वह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ अपना अनुभव और खेल के संस्कार साझा करना चाहते हैं.

 

'क्रिकेट ने मुझे कई बार हराया... लेकिन एक जगह कभी नहीं हारा'

अपने संदेश में रहाणे ने बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट, अपने साथियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजी, पत्नी राधिका, परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का आभार जताया.

उनके पूरे संदेश की सबसे भावुक पंक्तियां रहीं- 

'Ajinkya means unbeatable, but cricket has shown me defeat many times... There is one place where I was never defeated. And that was in your hearts.'

यानी रहाणे का मानना है कि मैदान पर जीत और हार खेल का हिस्सा रही, गलतियां भी हुईं, लेकिन प्रशंसकों के दिलों में उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा. यही उनके करियर की सबसे बड़ी जीत रही.

मेलबर्न की वह पारी... जिसने इतिहास बदल दिया

Advertisement

रहाणे का करियर कई यादगार पारियों से भरा रहा, लेकिन दिसंबर 2020 में मेलबर्न टेस्ट की 112 रनों की कप्तानी पारी हमेशा उनकी सबसे बड़ी पहचान रहेगी.

एडिलेड टेस्ट में भारत 36 रनों पर ऑलआउट हो गया था. विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर स्वदेश लौट चुके थे और पूरी दुनिया भारतीय टीम को सीरीज हारने का दावेदार मान रही थी. ऐसे कठिन समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली, शतक जड़ा और टीम को संभालते हुए भारत को 2-1 से ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जिताई. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह जीत हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगी.

विदेशी धरती पर भरोसे का दूसरा नाम

मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट में 1000 से ज्यादा रन बनाकर पहचान बनाने वाले रहाणे ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया. तीसरे ही टेस्ट में डरबन में 51* और 96 रन की पारियां खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय दे दिया.

इसके बाद वेलिंगटन में पहला टेस्ट शतक, 2014 में लॉर्ड्स पर 103 रन की मैच जिताऊ पारी, मेलबर्न, कोलंबो और जोहानिसबर्ग में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद विदेशी बल्लेबाजों में शामिल कर दिया.

2015-16 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में उन्होंने दो शतक लगाए. खास बात यह रही कि पूरी सीरीज में किसी और भारतीय बल्लेबाज ने शतक नहीं बनाया.

Advertisement

2017 में बेंगलुरु टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा के साथ उनकी साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज का रुख बदल दिया और बाद में उनकी कप्तानी में भारत ने धर्मशाला टेस्ट जीतकर सीरीज अपने नाम की.

गिरे... फिर लौटे भी

2022 में खराब फॉर्म के कारण रहाणे टीम से बाहर हो गए. कई लोगों ने मान लिया था कि उनका टेस्ट करियर खत्म हो गया है.

लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर वापसी की. 2023 विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में उन्हें मौका मिला और उन्होंने भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाए. हालांकि भारत खिताब जीतने से चूक गया, लेकिन रहाणे ने साबित कर दिया कि उनमें अभी भी बड़ी पारियां खेलने का दम बाकी है.

टेस्ट विशेषज्ञ से T20 फिनिशर तक

रहाणे को हमेशा पारंपरिक टेस्ट बल्लेबाज माना गया, लेकिन उन्होंने समय के साथ अपने खेल को बदला.

राजस्थान रॉयल्स के लिए 2012 और 2015 में 500 से अधिक रन बनाए. 2022-23 में मुंबई को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताई.

फिर आया आईपीएल 2023, जब चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें मौका दिया. उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 172.48 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए और मुंबई इंडियंस के खिलाफ सिर्फ 27 गेंदों में 61 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर सबको चौंका दिया. उसी साल उन्होंने अपने करियर का पहला आईपीएल खिताब भी जीता.

Advertisement

इसके बाद कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें दोबारा अपने साथ जोड़ा और 2025 तथा 2026 में टीम की कप्तानी सौंपी.

  • रहाणे का करियर एक नजर में
  • टेस्ट: 90 से अधिक मैच, 5000+ रन
  • टेस्ट शतक: 12
  • विदेशी धरती पर कई यादगार शतक
  • 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीतने वाले कप्तान
  • 2023 विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज
  • आईपीएल चैम्पियन (चेन्नई सुपर किंग्स, 2023)
  • केकेआर के कप्तान (2025 और 2026)
  • एक शांत योद्धा की विदाई

अजिंक्य रहाणे कभी सबसे चमकदार सितारे नहीं रहे, लेकिन जब भारतीय टीम मुश्किल में होती थी, तब अक्सर वही सबसे मजबूत दीवार बनकर खड़े दिखाई देते थे. उन्होंने कभी सुर्खियों से अपनी पहचान नहीं बनाई, बल्कि अपने बल्ले, अनुशासन और संयम से सम्मान अर्जित किया.

रहाणे का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं है. यह भारतीय टेस्ट क्रिकेट के उस दौर का अंत है, जहां तकनीक, धैर्य, सादगी और जिम्मेदारी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी. मेलबर्न का वह शतक, लॉर्ड्स की वह पारी और ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक जीत हमेशा याद दिलाएगी कि भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा बल्लेबाज भी था, जिसने बिना शोर मचाए अमिट छाप छोड़ दी.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »