महज 15 साल की उम्र में जिस वैभव सूर्यवंशी ने दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों को अपना मुरीद बना लिया है, उनके लिए अब भारत के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने बेहद अहम सलाह दी है. रहाणे का मानना है कि वैभव के पास असाधारण प्रतिभा है, लेकिन प्रतिभा को महान करियर में बदलने के लिए सिर्फ रन बनाना काफी नहीं होगा. अगले पांच से दस साल में परिवार, अनुशासन और सही मार्गदर्शन ही उनके करियर की असली परीक्षा होंगे.
'परिवार ही सबसे बड़ी ताकत बने'
'स्टिक टू क्रिकेट' पॉडकास्ट में रहाणे ने कहा कि इस उम्र में वैभव के आसपास शोहरत, विज्ञापन, लगातार यात्राएं और नए-नए लोग होंगे. ऐसे माहौल में परिवार को ही यह तय करना होगा कि उनका ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर रहे.
रहाणे ने कहा, 'उसे इस समय सही मार्गदर्शन की जरूरत है. यह सबसे पहले परिवार से आना चाहिए. परिवार को समझना होगा कि उसके लिए सबसे जरूरी क्या है. आजकल बहुत जल्दी नाम, शोहरत और लोगों की भीड़ मिल जाती है. ऐसे में अगले पांच-दस साल तक उसे अनुशासित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी.'
क्यों दी रहाणे ने यह सलाह?
रहाणे की यह सलाह यूं ही नहीं आई है. पिछले कुछ महीनों में वैभव ने जितनी तेजी से लोकप्रियता हासिल की है, उतनी शायद ही किसी भारतीय क्रिकेटर ने इतनी कम उम्र में पाई हो. आईपीएल 2026 में रिकॉर्ड 776 रन, ऑरेंज कैप, लगातार सुर्खियां और फिर भारतीय टीम में जगह. इन सबने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ने यह भी दिखा दिया कि अभी उन्हें बहुत कुछ सीखना है. इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने शुरुआती मुकाबलों में उनकी तकनीक की परीक्षा ली और कई बार उन्हें जल्दी आउट किया. हालांकि बाद में उन्होंने दो शानदार अर्धशतक लगाकर वापसी के संकेत भी दिए. यही वजह है कि क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें जल्दबाजी से बचाने की सलाह दे रहे हैं.
BCCI भी बरत रहा है खास सावधानी
वैभव अभी नाबालिग हैं. यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उनके साथ विशेष व्यवहार किया. विदेश दौरे पर उनके परिवार के सदस्य को साथ रहने की अनुमति दी गई, ताकि वह नए माहौल में सहज महसूस कर सकें. यह किसी भारतीय पुरुष क्रिकेटर के लिए बेहद दुर्लभ उदाहरण माना गया.
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी वैभव की प्रतिभा की खुलकर सराहना कर चुके हैं. हालांकि रहाणे का मानना है कि सिर्फ तारीफ से काम नहीं चलेगा. उन्होंने पहले भी कहा था कि वैभव को जल्दबाजी में टेस्ट क्रिकेट में नहीं उतारना चाहिए. टी20 लीग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच बड़ा अंतर है, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे हर प्रारूप के लिए तैयार करना ज्यादा समझदारी होगी.
अब सामने हैं सबसे बड़े इम्तिहान
वैभव के सामने अब एशियन गेम्स, लगातार अंतरराष्ट्रीय सीरीज और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े लक्ष्य हैं. उनकी बल्लेबाजी पर विपक्षी टीमें भी लगातार रणनीति बना रही हैं. ऐसे में सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी नहीं, बल्कि तकनीक, फिटनेस, मानसिक मजबूती और निरंतर प्रदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा.
इतिहास बताता है, शुरुआत नहीं... निरंतरता बनाती है महान खिलाड़ी
भारतीय क्रिकेट में कई खिलाड़ियों ने कम उम्र में सनसनी मचाई, लेकिन हर कोई लंबी रेस का खिलाड़ी नहीं बन सका. दूसरी ओर, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों ने वर्षों तक अनुशासन, मेहनत और लगातार सीखने की भूख के दम पर खुद को महान बनाया.
रहाणे का संदेश भी इसी ओर इशारा करता है. वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है. असली चुनौती अब इस प्रतिभा को अगले 10-15 वर्षों तक बरकरार रखने की है. अगर परिवार, टीम प्रबंधन और खुद वैभव इस संतुलन को बनाए रखने में सफल रहे, तो भारतीय क्रिकेट को आने वाले वर्षों में एक और बड़ा सुपरस्टार मिल सकता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क