दो मैच, दो धमाकेदार जीत और 29 गोल. एशियन गेम्स में खिताब बचाने उतरी भारतीय हॉकी टीम ने पूल-ए में शुरुआत तो तूफानी अंदाज में की है, लेकिन अब उसके सामने पहली ऐसी चुनौती है जो उसकी तैयारियों की असली तस्वीर सामने रखेगी. डिफेंडिंग चैम्पियन भारत गुरुवार को साउथ कोरिया से भिड़ेगा.
भारत ने अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया को 13-1 और श्रीलंका को 16-1 से हराकर की. इन दोनों मुकाबलों में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने जमकर गोल बरसाए, लेकिन कोरिया के खिलाफ मुकाबला अलग होगा. विश्व रैंकिंग में भारत आठवें और कोरिया 21वें स्थान पर है, फिर भी एशियन गेम्स में कोरिया का रिकॉर्ड उसे हल्के में लेने की इजाजत नहीं देता.
कोरिया चार बार एशियन गेम्स चैम्पियन रह चुका है और पिछले संस्करण में कांस्य पदक जीत चुका है. ऐसे में भारत के लिए गुरुवार का मुकाबला सिर्फ पूल मैच नहीं, बल्कि खिताब की राह में पहली गंभीर परीक्षा होगा.
गोलों की बारिश के बीच भारत की नजर डिफेंस पर
भारत के शुरुआती दो मैचों में सबसे ज्यादा चर्चा उसके आक्रामक खेल की रही है. स्ट्राइकर दिलप्रीत सिंह सात फील्ड गोल के साथ टीम के टॉप स्कोरर हैं. श्रीलंका के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर और एक स्ट्रोक से चार गोल करने वाले जुगराज सिंह भी शानदार फॉर्म में हैं.
वहीं, करिश्माई स्ट्राइकर अभिषेक ने श्रीलंका के खिलाफ हैट्रिक जमाकर अपनी धार दिखा दी है. यानी भारत के पास गोल करने वाले खिलाड़ियों की कमी नहीं है.
लेकिन असली सवाल दूसरी तरफ है. भारत ने इंडोनेशिया और श्रीलंका के खिलाफ 13-1 और 16-1 की जीत दर्ज की, फिर भी दोनों मुकाबलों में एक-एक गोल गंवाया. कोरिया के खिलाफ भारतीय डिफेंस की पहली बड़ी परीक्षा इसी वजह से होगी.
12 में सिर्फ 5 पेनल्टी कॉर्नर गोल
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने भी सुधार के लिए सबसे अहम क्षेत्रों में पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन को रखा है. श्रीलंका के खिलाफ भारत को 12 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह सिर्फ पांच को गोल में बदल सका.
एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में यह आंकड़ा भारत के लिए आगे चलकर निर्णायक हो सकता है. कोरिया जैसी टीम के खिलाफ मौके मिलने पर उन्हें गोल में बदलना बेहद जरूरी होगा.
वर्ल्ड कप की निराशा को सोने में बदलने का मौका
भारत हाल में नीदरलैंड्स और बेल्जियम में खेले गए FIH वर्ल्ड कप में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका था और आठवें स्थान पर रहा. अब टीम के पास उस निराशा को पीछे छोड़कर एशियन गेम्स में सीधे 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट हासिल करने का मौका है.
एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन मिलेगा. लिहाजा भारत के लिए यहां सिर्फ खिताब की रक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि ओलंपिक टिकट भी दांव पर है.
फुल्टन पहले ही साफ कर चुके हैं कि वर्ल्ड कप से मिली सीख को अब मैदान पर उतारना होगा. उनके मुताबिक टीम ने वर्ल्ड कप के बाद अपनी कमियों की पहचान की है और अब उन सुधारों को खेल में लागू करना उसका अगला लक्ष्य है.
सेमीफाइनल की राह भी साफ करनी होगी
12 टीमों के इस टूर्नामेंट में प्रत्येक पूल से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. कोरिया के बाद भारत को शनिवार को मेजबान और पिछले संस्करण के रजत पदक विजेता जापान से भिड़ना है. पूल चरण का आखिरी मुकाबला 28 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ होगा.
बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबला अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है, लेकिन कोरिया और जापान के खिलाफ मैच भारत की असली तस्वीर सामने रखेंगे.
दो मैचों में 29 गोल कर भारत ने अपना इरादा बता दिया है. अब कोरिया के खिलाफ उसे यह साबित करना है कि वह सिर्फ गोलों की मशीन नहीं, बल्कि मुश्किल मुकाबलों में भी खिताब बचाने का दम रखता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क