RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लंदन में एकता के जश्न कार्यक्रम में हिंदुत्व, सेवा और समाज के भविष्य पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि संघ की नींव नफरत नहीं, बल्कि सात्त्विक प्रेम और अपनापन है। उन्होंने व्यक्ति, समाज, मानवता और प्रकृति के संतुलित विकास को जरूरी बताते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर दिया।