तैरती ही नहीं, चलती भी है यह शार्क! पापुआ न्यू गिनी में मिली नई प्रजाति ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

एक ऐसी शार्क प्रजाति की पहचान हुई है जो अपने पंखों की मदद से कम पानी और रीफ पर चल सकती है. पापुआ न्यू गिनी में मिली यह नई प्रजाति दुनिया की 10वीं 'वॉकिंग शार्क' है.

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ये है वॉकिंग शार्क जिसे कई अन्य नामों से भी बुलाया जाता है. (Photo: Getty) ये है वॉकिंग शार्क जिसे कई अन्य नामों से भी बुलाया जाता है. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

शार्क का नाम सुनते ही दिमाग में समुद्र का एक खतरनाक शिकारी आता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब ऐसी शार्क की पहचान की है जो तैरने के साथ-साथ चल भी सकती है. पापुआ न्यू गिनी के तटीय इलाके में मिली इस नई प्रजाति को वॉकिंग शार्क कहा जा रहा है. यह अपने पेक्टोरल फिन (सामने वाले पंख) का इस्तेमाल पैरों की तरह करती है. कम पानी में और कोरल रीफ के ऊपर चलती है. 

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पापुआ न्यू गिनी के मिल्ने बे क्षेत्र में रहने लोग इस अनोखी शार्क को लंबे समय से देखते आ रहे हैं. स्थानीय भाषा में इसे काडेडेकेडेवा कहा जाता है, जिसका मतलब डॉग शार्क या आलसी शार्क होता है. हालांकि स्थानीय लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब इसकी औपचारिक पहचान करते हुए इसे एक नई प्रजाति घोषित किया है. 

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कैसे हुई नई प्रजाति की पहचान?

यह शार्क Hemiscyllium जीनस का हिस्सा है, जिसे आमतोर पर वॉकिंग शार्क या एपॉलेट शार्क कहा जाता है. अब तक इस समूह की 9 प्रजातियां वैज्ञानिकों के रिकॉर्ड में थी. अब यह संख्या बढ़कर 10 हो गई है. 

इस नई प्रजाति का नाम Hemiscyllium dudgeonae रखा गया है. इसका नाम ऑस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक क्रिस्टीन डजियन के सम्मान में रखा गया है, जो इसकी पहचान करने वाली रिसर्च टीम का हिस्सा थीं. 

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मार्च 2025 में वैज्ञानिकों की एक टीम मिल्ने बे के समुद्री इलाके में सर्वे कर रही थी. इसी दौरान करीब एक मीटर गहरे पानी में उन्हें एक शार्क दिखाई दी. शुरुआत में टीम किसी दूसरी प्रजाति की तलीश कर रही थी, लेकिन इस शार्क का रंग और शरीर पर बने निशान बाकी वॉकिंग शार्क से अलग नजर आए. 

बाद में टीम ने कई और सैंपल जुटाए उनके डीएनए की जांच की. डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि यह पहले से परिचित किसी भी वॉकिंग शार्क से अलग है. 

क्या है इसकी सबसे बड़ी खासियत?

वॉकिंग शार्क अपने पेक्टोरल और पेल्विक फिन की मदद से समुद्र की सतह पर आगे बढ़ सकती हैं. लो टाइड के समय ये कम पानी, कोरल रीफ और समुद्री घास वाले इलाकों में आसानी से घूमती हैं. ये मुख्य रूप से तल पर रहने वाले छोटे जीवों और इनवर्टीब्रेट्स को खाती है. नई प्रजाति के शरीर पर छोटे-छोटे डैश निशान बने हैं, जो ब्रेल लिपि या मोर्स कोड की तरह दिखाई देते हैं. यही पैटर्न इसे दूसरी वॉकिंग शार्क से अलग बनाता है. 

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वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नई शार्क प्रजाति शायद सिर्फ पापुआ न्यू गिनी के मिल्ने बे इलाके में ही पाई जाती है. समुद्र किनारे हो रहे बदलाव और इसके रहने की जगह कम होने की वजह से इसकी संख्या घट सकती है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इसे बचाने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रजाति हमेशा के लिए खत्म हो सकती है.

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नई प्रजाति की इस खोज के साथ दुनिया में दर्ज वॉकिंग शार्क की संख्या 10 हो गई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पापुआ न्यू गिनी की समृद्ध समुद्री जैव विविधता को भी सामने लाती है, जहां अब भी कई समुद्री जीवों के बारे में नई जानकारियां सामने आ रही हैं.

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