जिस उम्र की बातें आमतौर पर किसी को याद नहीं रहतीं, एक 16 साल का लड़का उन्हें भी याद करने का दावा करता है. उसने बताया कि उसे करीब 3 महीने की उम्र से जुड़ी कुछ यादें तक हैं. इतना ही नहीं, कोई गाना, खुशबू या छोटा सा वाक्य उसकी सालों पुरानी यादों को अचानक वापस ला सकता है. वैज्ञानिकों ने जब इस लड़के की याददाश्त की जांच की, तो अपनी जिंदगी की घटनाएं याद करने के मामले में उसकी क्षमता सामान्य आबादी के 99.9 फीसदी से ज्यादा लोगों से बेहतर पाई गई.
पहचान छिपाने के लिए रिसर्चर्स ने इस लड़के को KCL नाम दिया है. उसके मामले को हाइली सुपीरियर ऑटोबायोग्राफिकल मेमोरी (HSAM) के तौर पर दर्ज किया गया है. यह एक बेहद दुर्लभ स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी जिंदगी में हुई घटनाओं को लंबे समय बाद भी बहुत डिटेल में याद कर सकता है. इस केस की स्टडी जर्नल कॉरटेक्स में छपी है.
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KCL ने फरवरी 2025 में कॉग्निटिव रिसर्चर क्रिस्टियन बार्जिकोव्स्की से संपर्क किया था. उसने बताया कि उसे बचपन की कई घटनाएं साफ तौर पर याद हैं. 2010 और 2011 की कुछ शुरुआती यादों के बारे में उसके माता-पिता ने भी जानकारी की पुष्टि की. हालांकि करीब 3 महीने की उम्र की यादों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है.
KCL के मुताबिक, अगस्त 2022 के बाद बीते करीब आधे दिनों की घटनाएं उसे काफी डिटेल में याद रहती हैं. खास बात यह है कि इन यादों को सामने लाने के लिए उसे हमेशा जानबूझकर कोशिश नहीं करनी पड़ती. कई बार रोजमर्रा की छोटी-सी चीज उसके दिमाग में पुरानी घटना की याद ले आती है.
एक गाना या खुशबू कैसे खोल देती है पुरानी याद?
रिसर्चर्स ने पाया कि KCL के मामले में अपनी जिंदगी से जुड़ी यादें बिना किसी कोशिश के भी ज्यादा बार सामने आती हैं. किसी गंध, गाने, शब्द या वाक्य से जुड़ा कोई छोटा सा संकेत उसे अचानक पुरानी घटना याद दिला सकता है. इसे इनवॉलंटरी ऑटोबायोग्राफिकल मेमोरी कहा जाता है. इसी क्षमता को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने KCL का कंप्यूटर टेस्ट किया.
उसे स्क्रीन पर दिखने वाले पैटर्न पर ध्यान देना था और बीच-बीच में बताया जाता था कि उस समय उसके दिमाग में क्या चल रहा था. टेस्ट में KCL के अचानक आने वाले विचारों में करीब 87 फीसदी उसकी अपनी पुरानी यादों से जुड़े थे. सामान्य लोगों के उपलब्ध तुलना वाले डेटा में यह आंकड़ा करीब 39 फीसदी था. यानी टेस्ट के दौरान KCL का दिमाग सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा बार अपने पुराने अनुभवों की तरफ जा रहा था.
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क्या उसकी हर तरह की मेमोरी तेज है?
रिसर्च में KCL की अटेंशन, वर्किंग मेमोरी और एग्जीक्यूटिव फंक्शनिंग सामान्य स्तर पर पाई गई. भविष्य को लेकर अचानक आने वाले विचारों की फ्रीक्वेंसी भी सामान्य थी. यानी HSAM का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति हर चीज को बाकी लोगों से बेहतर याद रखता है. इस मामले में खास अंतर अपनी जिंदगी से जुड़ी घटनाओं को याद करने और उन यादों तक जल्दी पहुंच पाने में दिखाई देता है.
वैज्ञानिकों को इस केस से क्या पता चला?
HSAM के मामले बेहद दुर्लभ हैं. इसका पहला आधिकारिक केस 2006 में सामने आया था. इसके बाद ऐसे और मामले दर्ज किए गए, लेकिन ज्यादातर रिसर्च में लोगों की जानबूझकर पुरानी यादें याद करने की क्षमता पर ध्यान दिया गया. KCL के केस में वैज्ञानिकों ने खास तौर पर यह देखा कि पुरानी यादें अपने आप कितनी बार सामने आती हैं.
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रिसर्चर्स के मुताबिक, यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि HSAM सिर्फ ज्यादा मेमोरी रखने का मामला नहीं है, बल्कि दिमाग में पुरानी ऑटोबायोग्राफिकल यादों तक पहुंचने का तरीका भी अलग हो सकता है. हालांकि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर आधारित केस स्टडी है. इसलिए यह जानने के लिए आगे और लोगों पर रिसर्च करनी होगी कि क्या यही पैटर्न दूसरे HSAM मामलों में भी देखने को मिलता है.
आजतक साइंस डेस्क