पंखों पर उल्लू की आंखें क्यों? शिकारियों को चकमा देने का अनोखा तरीका

एक तितली, जिसके पंखों पर बनी हैं उल्लू जैसी बड़ी-बड़ी आंखें. ये निशान सिर्फ देखने में अलग नहीं हैं, बल्कि शिकारियों को भ्रमित करने में भी मदद कर सकते हैं. जानिए, प्रकृति की इस अनोखी तितली के पंखों का क्या है राज.

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ये है आउल बटरफ्लाई जिसके पंखों को देखने से उल्लू की फीलिंग आती है. (Photo: Getty) ये है आउल बटरफ्लाई जिसके पंखों को देखने से उल्लू की फीलिंग आती है. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:27 PM IST

उल्लू की आंखों जैसे बड़े-बड़े निशान वाली आउल बटरफ्लाई अपनी अलग पहचान के लिए जानी जाती है. यह बटरफ्लाई मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पाई जाती है. इसके भूरे पंखों पर बने गोल निशान उल्लू की आंखों जैसे दिखते हैं. ये निशान शिकारियों को भ्रमित करने में मदद कर सकते हैं. लेकिन इस बटरफ्लाई के पंखों पर ऐसे निशान क्यों होते हैं, यह कहां रहती है और क्या खाती है? 

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आउल बटरफ्लाई के पंखों पर बने निशान इसे दूसरी बटरफ्लाई से अलग बनाते हैं. वैज्ञानिक ने इन निशानों का अध्ययन किया है, ताकि समझा जा सके कि ये तित्लीयों को शिकारियों से बचने में कैसे मदद करते हैं. आउल बटरफ्लाई के पंखों के नीचे की तरफ बड़े-बड़े गोल निशान होते हैं. इनके बीच का हिस्सा गहरा और आसपास का हिस्सा हल्के रंग का होता है. ये निशान उल्लू की आंखों जैसे दिखते हैं. जब यह तितली अपने पंख बंद करके बैठती है, तब ये निशान साफ दिखाई देते हैं.

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इन निशानों से तितली को शिकारियों से बचने में मदद मिल सकती है. जब कोई बर्ड इसे देखता है, तो पंखों पर बने निशान उसे कुछ पल के लिए भ्रमित कर सकते हैं. इस दौरान तितली को उड़कर बचने का मौका मिल सकता है. हालांकि, ये निशान हर बार उसे शिकार होने से नहीं बचा पाते.

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कहां पाई जाती है आउल बटरफ्लाई?

आउल बटरफ्लाई मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पाई जाती है. यह गर्म और नमी वाले इलाकों में रहती है. कालिगो बटरफ्लाई के एक ग्रुप का नाम है, जिसमें आउल बटरफ्लाई की कई प्रजाती  शामिल हैं. इस तितली के पंख काफी बड़े होते हैं. प्रजाती  के हिसाब से इसके पंख फैलाने पर चौड़ाई करीब 20 सेंटीमीटर तक हो सकती है. इसके भूरे पंख इसे पेड़ों और आसपास की जगहों में छिपने में भी मदद करते हैं.

क्या खाती है आउल बटरफ्लाई?

आउल बटरफ्लाई पके और सड़ने लगे फलों का जूस पीती है. इसे केला, आम और अनानास जैसे फलों से जूस मिलता है. यह सिर्फ फूलों के जूस पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि दूसरे तरीकों से भी भोजन ले सकती है. इसके बच्चे, जिन्हें इल्ली कहा जाता है, पौधों की पत्तियां खाते हैं. कुछ प्रजाति  की इल्लियां केले और गन्ने जैसे पौधों की पत्तियां भी खाती हैं. इनकी संख्या ज्यादा होने पर ये खेती को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

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वैज्ञानिकों ने क्या पाया?

साल 2015 में प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी नाम की साइंस जर्नल में एक रिसर्च छपी थी. इसमें वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि तितली के पंखों पर आंख जैसे निशान देखकर बर्ड्स कैसे रिएक्ट करते हैं. रिसर्च में पाया गया कि आंख जैसे निशान बर्ड्स को भ्रमित कर सकते हैं. 

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इससे पता चलता है कि ऐसे निशान शिकारियों से बचने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, यह प्रयोग हर तरह के शिकारी और असली जंगल के माहौल में नहीं किया गया था. कुछ दूसरी रिसर्च में यह भी देखा गया है कि कालिगो ग्रुप की कुछ तित्लीयों में पंखों के निशान साथी को आकर्षित करने में भूमिका निभा सकते हैं. यानी इन निशानों का काम सिर्फ दुश्मनों से बचना ही नहीं हो सकता.

 आउल बटरफ्लाई की सबसे बड़ी पहचान उसके पंखों पर बने उल्लू की आंखों जैसे निशान हैं. ये निशान शिकारियों को भ्रमित करने में मदद कर सकते हैं. कुछ प्रजाती में इनका संबंध साथी को आकर्षित करने से भी हो सकता है. वैज्ञानिक इन निशानों के अलग-अलग काम को समझने के लिए इनका अध्ययन कर रहे हैं.

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