नासा का प्रसिद्ध स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप आखिरकार पृथ्वी पर वापस आ गया है. 4 नवंबर 2026 को सुबह 7:39 बजे पूर्वी समय के अनुसार यह उत्तरी सुमात्रा के ऊपर वायुमंडल में प्रवेश कर गया. लगभग 1450 किलोग्राम वजन वाले इस मिनीबस आकार के ऑब्जरवेटरी ने 22 साल तक ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन किया.
बचाव का प्रयास विफल होने के बाद इसका अनियंत्रित पतन तय हो गया था. नासा के अनुसार इसका ज्यादातर हिस्सा जल गया और किसी को नुकसान पहुंचने की संभावना केवल 1 में 2100 थी. स्विफ्ट को नवंबर 2004 में लॉन्च किया गया था. इसका मूल मिशन सिर्फ दो साल का था जिसमें गामा-रे बर्स्ट यानी ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन करना था.
यह ऑब्जरवेटरी इतनी फुर्तीली थी कि बर्स्ट का पता लगाते ही एक मिनट के अंदर अपनी दूरबीनों को उस दिशा में घुमा लेती थी. इसी वजह से इसका नाम स्विफ्ट पड़ा जो अंग्रेजी में तेज पक्षी को कहते हैं. 2018 में इसे इसके पहले प्रमुख वैज्ञानिक नील गेहरल्स के नाम पर नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी कर दिया गया.
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दो साल के मिशन के बावजूद स्विफ्ट ने दो दशक से ज्यादा काम किया. इसने 2000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट और 1400 से अधिक सुपरनोवा विस्फोटों का अध्ययन किया. सुदूर ब्लैक होल, क्षुद्रग्रह और धूमकेतु जैसी कई अन्य चीजों पर भी इसने महत्वपूर्ण आंकड़े दिए. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसने तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली टिप्पणियों का महत्व साबित किया और खगोल भौतिकी में क्रांति लाई.
बचाव मिशन क्यों जरूरी था और कैसे फेल हुआ
स्विफ्ट के पास अपना थ्रस्टर नहीं था इसलिए वायुमंडलीय घर्षण के कारण यह धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर गिर रहा था. ऊंचाई कम होने के साथ यह प्रक्रिया तेज हो गई. सितंबर 2025 में नासा ने एरिजोना की कंपनी काटालिस्ट स्पेस को 30 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया.
कंपनी का लिंक नामक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट जुलाई में लॉन्च हुआ और अगस्त में स्विफ्ट को पकड़कर ऊंची कक्षा में ले जाने वाला था. लेकिन प्रोपल्शन सिस्टम और रिएक्शन व्हील्स में खराबी आ गई. लिंक खुद 25 सितंबर को पृथ्वी पर गिर गया.
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नासा ने इसे उच्च जोखिम वाला लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया. इससे उपग्रह सर्विसिंग तकनीक आगे बढ़ी और भविष्य में अन्य उपग्रहों को बचाने के सबक मिले. स्विफ्ट ने अपना आखिरी वैज्ञानिक अवलोकन 20 अक्टूबर को पूरा किया था.
स्विफ्ट का गिरना असामान्य नहीं है. हर दिन औसतन तीन बड़े अंतरिक्ष मलबे पृथ्वी पर गिरते हैं. भविष्य में सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ने से यह समस्या और बढ़ेगी. स्विफ्ट ने साबित किया कि अच्छे डिजाइन वाले मिशन अपनी निर्धारित अवधि से बहुत आगे जा सकते हैं. इसका योगदान लंबे समय तक वैज्ञानिकों को नई खोजों में मदद करेगा. यह घटना अंतरिक्ष कचरे के प्रबंधन और उपग्रहों को लंबी उम्र देने वाली तकनीकों की जरूरत को रेखांकित करती है.
आजतक साइंस डेस्क