दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी और खराब हवा से जूझ रही है. सोमवार को शहर ने 14 साल का सबसे गर्म मई की रात थी, जबकि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 254 तक पहुंच गया और 'खराब' श्रेणी में चला गया था. धूल भरी हवाएं, धुंध और फंसे हुए प्रदूषक लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. लेकिन क्या इस मई की हवा वाकई इतनी खराब है जितना लग रहा है? आंकड़े बताते हैं कि स्थिति पिछले कई सालों की तुलना में बेहतर है.
मई 2026 का औसत AQI पिछले सालों से बेहतर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से 25 मई 2026 तक दिल्ली का औसत AQI 156 रहा. यह पिछले एक दशक के कई सालों से काफी कम है.
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सबसे खराब मई 2017 का था, जब औसत AQI 266 पहुंच गया था. कई बार 300 के पार चला गया था. 2019 में औसत AQI 227 रहा, जबकि 2024 में यह 224 था. यानी 2026 में हवा पिछले कई सालों की तुलना में साफ है, भले ही गर्मी और धूल ने AQI को अस्थाई रूप से बढ़ा दिया हो.
दिल्ली ने सोमवार को 14 साल में सबसे गर्म मई की रात दर्ज की. न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. तेज गर्मी, धूल भरी हवाएं और हवा में फंसे प्रदूषण वाले तत्वों ने मिलकर राजधानीवासियों को खासी परेशानी दी.
कोविड काल में थी सबसे साफ हवा
पिछले दशक में दिल्ली की सबसे साफ हवा कोविड-19 महामारी के सालों 2020 और 2021 में देखने को मिली थी. इन दोनों सालों में मई का औसत AQI क्रमशः 148 और 150 रहा. कारण था - सड़कों पर कम वाहन, बंद कारखाने और निर्माण कार्यों पर रोक. इससे साफ पता चलता है कि वाहन, उद्योग और निर्माण गतिविधियां दिल्ली की हवा बिगाड़ने के प्रमुख कारण हैं.
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हवा के खराब होने पर 19 मई को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-1 लागू कर दिया. इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण के कई उपाय शुरू किए गए.
कब मिलेगी राहत?
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 28 मई से गर्मी कम होने की उम्मीद है. 28 से 31 मई के बीच हल्की से बहुत हल्की बारिश, गरज-चमक के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की संभावना है. अधिकतम तापमान में 27 मई तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद 7-8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है.
मई में गर्म हवाएं राजस्थान और पश्चिमी क्षेत्रों से धूल उड़ाकर दिल्ली ले आती हैं. गर्मी के कारण वायुमंडल स्थिर हो जाता है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते और जमीन के पास फंस जाते हैं. इससे AQI अचानक बढ़ जाता है. हालांकि, कुल मिलाकर इस साल मई की हवा पिछले सालों से बेहतर है, जो सकारात्मक बात है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली को स्थाई समाधान की जरूरत है. वाहनों की संख्या पर नियंत्रण, निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण, औद्योगिक प्रदूषण कम करना और पेड़ लगाना जैसे उपाय लगातार करने होंगे. मौसम की मार तो आएगी-जाएगी, लेकिन लंबे समय तक साफ हवा बनाए रखना ही असली चुनौती है.
इस मई में गर्मी और धूल ने दिल्ली की हवा को खराब जरूर किया, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि स्थिति 2017, 2019 या 2024 जितनी बुरी नहीं है. औसत AQI 156 रहना राहत की खबर है. अब 28 मई से बारिश और ठंडी हवाओं के आने की उम्मीद है, जो लोगों को कुछ राहत देगी.
प्रतीक सचान