'काली बारिश' की चपेट में मॉस्को, यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद रूस में लोग दहशत में

यूक्रेन के ड्रोन हमले में मॉस्को की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया. इस धमाके से निकले अधूरे जले कार्बन और तेल के कण मिल गए, जिससे मॉस्को के आसमान से हानिकारक 'काली बारिश' होने लगी.

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यूक्रेनी डोन हमले के बाद मॉस्को के लोगों ने काली बारिश की शिकायत की है. (Photo: Reuters) यूक्रेनी डोन हमले के बाद मॉस्को के लोगों ने काली बारिश की शिकायत की है. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

यूक्रेन द्वारा किए गए अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमले ने रूस की राजधानी मॉस्को को दहला दिया है. इस हमले के बाद मॉस्को के दक्षिण-पूर्वी इलाकों, जैसे कपोत्न्या और आसपास के क्षेत्रों में आसमान से 'काली बारिश' (Black Rain) होने की अजीबोगरीब और डरावनी घटना सामने आई है. स्थानीय निवासियों के वाहनों, कपड़ों और सड़कों पर काले रंग के चिपचिपे तेल की बूंदें और कालिख जम गई है, जिसने वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को गहरी चिंता में डाल दिया है. 

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यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने इस हमले को जायज ठहराते हुए कहा है कि हम यह युद्ध कभी नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा, तो तुम्हारा मॉस्को भी जलेगा. यह हमला यूक्रेन के कीव में स्थित एक ऐतिहासिक मठ पर रूसी हमले के जवाब में किया गया था. इस भीषण सैन्य टकराव के बीच, मॉस्को में हुई इस 'काली बारिश' ने आम नागरिकों के मन में दहशत पैदा कर दी है. 

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इतिहास का सबसे बड़ा ड्रोन हमला और तेल रिफाइनरी पर निशाना

यूक्रेन ने मॉस्को को निशाना बनाते हुए सैकड़ों ड्रोन दागे, जिसे इस युद्ध का अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला माना जा रहा है. हालांकि रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उनके हवाई डिफेंस सिस्टम ने देश भर में फैले सैकड़ों ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन कई ड्रोन मॉस्को के आसमान को भेदने में सफल रहे.   

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इस हमले का मुख्य निशाना मॉस्को के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित कपोत्न्या तेल रिफाइनरी थी. यह रिफाइनरी मॉस्को की कुल पेट्रोल खपत का लगभग 40% और डीजल का आधा हिस्सा आपूर्ति करती है. यूक्रेनी ड्रोनों (जिनमें नए हाइब्रिड 'Bars' ड्रोन-क्रूज मिसाइल भी शामिल थे) ने रिफाइनरी के विशाल तेल भंडारण टैंकों पर सटीक निशाना साधा.

विस्फोट इतना भयानक था कि तेल के बड़े टैंक की छत हवा में दर्जनों मीटर ऊपर उड़ गई और आसमान में कई किलोमीटर ऊंचे काले धुएं के गुबार उठने लगे. इस भीषण आग के कारण मॉस्को के कई हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा और सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं.

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क्या है 'काली बारिश' और मॉस्को में यह कैसे हुई?

हमले के कुछ ही घंटों बाद, रिफाइनरी से कई किलोमीटर दूर स्थित बालाशीखा और अन्य उपनगरों के निवासियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा करनी शुरू कर दीं. इन वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि आसमान से पानी की बूंदों के साथ काले रंग के धब्बे गिर रहे थे. 

कारों की छतों पर काले तेल की परत जम गई थी. बाहर निकले लोगों के कपड़े काली कालिख और तैलीय बूंदों से खराब हो गए थे. स्थानीय प्रशासन ने शुरुआत में किसी भी प्रकार की ऑयल रेन से इनकार किया, लेकिन बाद में खतरे को भांपते हुए मॉस्को के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर एक चेतावनी जारी की गई. 

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प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अपनी खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी और बच्चों, बुजुर्गों तथा अस्थमा के मरीजों को तुरंत उस इलाके से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा.

काली बारिश के पीछे का वैज्ञानिक कारण 

आसमान से सामान्य पानी की जगह काले तैलीय पदार्थ का गिरना कोई दैवीय प्रकोप नहीं, बल्कि एक विशुद्ध भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया है. इस घटना को ऐसे समझा जा सकता है...

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तेल का पूरा न जलना और कालिख का निर्माण

जब ड्रोनों ने रिफाइनरी के कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन के टैंकों पर हमला किया, तो वहां भीषण आग लग गई. पेट्रोलियम उत्पाद हाइड्रोकार्बन होते हैं. जब अत्यधिक मात्रा में तेल एक साथ जलता है, तो वहां ऑक्सीजन की कमी हो जाती है.

ऑक्सीजन की कमी के कारण तेल पूरा नहीं जलता. इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में बिना जला हुआ कार्बन, जिसे कालिख कहा जाता है, बेहद बारीक कणों के रूप में हवा में मुक्त हो जाता है. यही कारण था कि आसमान में गहरे काले रंग का गाढ़ा धुआं छा गया.   

रिफाइनरी से निकली गर्म हवा का असर 

रिफाइनरी में लगी आग से अत्यधिक ऊर्जा और गर्मी पैदा हुई. इस अत्यधिक तापमान के कारण रिफाइनरी के ऊपर की हवा गर्म होकर बहुत तेजी से ऊपर की ओर उठी, जिसे विज्ञान में थर्मल अपड्राफ्ट कहा जाता है. यह शक्तिशाली गर्म हवा अपने साथ बिना जले हुए कच्चे तेल की सूक्ष्म बूंदों और भारी कालिख को वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक ले गई.

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कंडेनसेशन न्यूक्लिआई और बूंदों का निर्माण

जब ये बारीक कार्बन कण और तेल की बूंदें वायुमंडल के ऊपरी और ठंडे हिस्सों में पहुंचीं, तो  उन्होंने कंडेनसेशन न्यूक्लिआई की तरह काम किया. हवा में मौजूद नमी इन कार्बन कणों और तैलीय तत्वों के चारों ओर जमा होने लगी. रिफाइनरी से भाप बना तेल भी ऊपर जाकर ठंडा हुआ और वापस तरल बूंदों में बदलने लगा.

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गुरुत्वाकर्षण और बारिश का प्रभाव

जब ये तैलीय और कालिख से युक्त बूंदें हवा में तैरने के लिए बहुत भारी हो गईं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वे नीचे गिरने लगीं. चूंकि उस समय इलाके में हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी, इसलिए प्राकृतिक वर्षा की बूंदों ने हवा में तैरते इन हाइड्रोकार्बन और कालिख के कणों को अपने साथ मिला लिया. जब यह मिश्रण जमीन पर गिरा, तो इसने एक तैलीय और चिपचिपी काली बारिश का रूप ले लिया.

पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव

यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि पेट्रोलियम पदार्थों से युक्त 'काली बारिश' पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होती है।

  • सांस संबंधी बीमारियां: हवा में मौजूद बारीक कार्बन कण (PM 2.5) सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं. इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग के मरीजों के लिए अचानक जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है.
  • त्वचा और बालों को नुकसान: इस तैलीय बारिश के संपर्क में आने से त्वचा पर एलर्जी, जलन और बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है, क्योंकि इसमें जटिल रासायनिक यौगिक और कैंसर पैदा करने वाले तत्व जैसे पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन हो सकते हैं.
  • मृदा और जल प्रदूषण: जब यह काला तेल बहकर स्थानीय जल निकायों में जाएगा या जमीन में समाएगा, तो यह पीने के पानी के स्रोतों को दूषित कर देगा और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी नुकसान पहुंचाएगा.

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मॉस्को में हुई 'काली बारिश' इस बात का सबूत है कि आधुनिक युद्ध केवल मोर्चे पर लड़ रहे सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है,स बल्कि इसके विनाशकारी पर्यावरणीय परिणाम आम नागरिकों को भुगतने पड़ रहे हैं. यूक्रेन द्वारा रूस के आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को खराब करने की इस रणनीति ने युद्ध को रूस के आम लोगों के घरों के दरवाजे तक पहुंचा दिया है. 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह घटना औद्योगिक आपदा और प्रतिकूल मौसम के मिलन का नतीजा है, जो आने वाले दिनों में मॉस्को के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट का सबब बन सकती है.

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