Chaitra Navratri 2026: अनजाने में टूट गया है नवरात्र का व्रत? घबराएं नहीं, इन आसान उपायों से दूर होगा दोष

Chaitra Navratri 2026: नवरात्र हिंदू धर्म का सबसे बड़ा आस्था और भक्ति का पर्व है. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए भक्त नौ दिनों तक कठिन उपवास रखते हैं. लेकिन कई बार किसी हेल्थ इश्यू या अनजाने में हुई गलती के कारण व्रत टूट जाता है. ऐसे में आज हम आपको कुछ विशेष उपाय बताएंगे, जिन्हें करके व्रत का दोष दूर किया जा सकता है.

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भूल से टूट गया है नवरात्रि का व्रत! इन उपायों से दूर होगा दोष (Photo- ITG) भूल से टूट गया है नवरात्रि का व्रत! इन उपायों से दूर होगा दोष (Photo- ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

Chaitra Navratri 2026: नवरात्र का व्रत श्रद्धा और आस्था का पर्व होता है. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए भक्त नौ दिनों तक उपवास और नियमों का पालन करते हैं. लेकिन कई बार किसी कारण से व्रत टूट जाता है, जिससे लोग डर जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, अगर भक्ति का भाव सच्चा हो तो अनजाने में हुई गलती के लिए प्रायश्चित किया जा सकता है. व्रत का महत्व केवल भोजन से नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति सच्चे भावना से है. इसलिए, अगर अनजाने में व्रत टूट जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. आइए जानते हैं कि व्रत टूटने पर क्या करना चाहिए.

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क्षमा याचना करें
अगर भूलवश आपका व्रत टूट गया है तो सबसे पहले मां दुर्गा से क्षमा मांगें. मंदिर के सामने बैठकर हाथ जोड़ें और सच्चे मन से अपनी गलती के लिए प्रार्थना करें. इसके साथ ही 'ऊं दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का 108 बार माला जप करें. इससे मानसिक अशांति दूर होती है और व्रत का दोष कम होता है.

छोटा हवन और गंगाजल का छिड़काव  
अगर आपसे बड़ी चूक हुई है तो घर में एक छोटा सा हवन कर सकते हैं. इसके लिए आम की लकड़ियों पर कपूर, घी और हवन सामग्री से मां के नाम की आहुतियां दें. हवन के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें. इससे घर का माहौल सकारात्मक हो जाएगा.

दान-पुण्य करें
हिंदू धर्म में दान को सबसे बड़ा प्रायश्चित माना गया है. ऐसे में नवरात्र व्रत टूटने पर अपनी क्षमतानुसार सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चीनी, चावल या सफेद वस्त्र किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को दान करें.

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कन्या पूजन करें
छोटी कन्याओं को माता का रूप माना जाता है. ऐसे में किसी कारण से व्रत टूट जाए तो दो छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक भोजन कराएं. भोजन के बाद उन्हें फल या दक्षिणा देकर विदा करें.

ध्यान रखें, अगर आपका व्रत किसी सेहत से जुड़ी समस्या के कारण टूटा है तो खुद को दोष न दें. ऐसे में मन में शुद्ध विचार रखें और अपनी क्षमता अनुसार पूजा जारी रखें.

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