Ramayan: जुलाई के आखिरी में रामायण का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है, जिसने आते ही सबके दिलों में जगह बना ली है. जैसे ही फिल्म का ट्रेलर सबके सामने आया, उसके सभी किरदार चर्चा का विषय बने हुए हैं. इसी फिल्म में मंथरा अथवा कुबड़ी का किरदार भी सुर्खियां बटोर रहा है. दरअसल, इस फिल्म में मंथरा अथवा कुबड़ी का रोल शीबा चड्ढा करती नजर आ रही हैं. वैसे मंथरा अथवा कुबड़ी को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर वह थी कौन और रामायण में कैसे उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. आइए मंथरा अथवा कुबड़ी के बारे में सब कुछ जानते हैं.
कौन थी मंथरा?
पौराणिक ग्रंथ रामायण के मुताबिक, मंथरा रानी कैकेयी की सबसे प्रिय दासी थी. कैकेयी राजा दशरथ की सबसे प्रिय रानी थीं और भरत जी की माता थीं. मंथरा बूढ़ी थी और उसकी पीठ झुकी हुई थी, इसी कारण उसे सब कुबड़ी भी बुलाते थे. राजा दशरथ अपनी सुंदर और युवा रानी कैकेयी से बहुत प्रेम करते थे. इसलिए कैकेयी की खास दासी होने के कारण, मंथरा को भी अयोध्या के महल में अन्य सेवकों के बीच खास सम्मान मिला हुआ था.
मंथरा ने कैकेयी की देखभाल तब से की थी, जब वह कैकेय देश में एक राजकुमारी थीं. इसी कारण कैकेयी को उस पर पूरा भरोसा था और वह उससे बहुत स्नेह करती थीं. जब कैकेयी का विवाह राजा दशरथ से हुआ, तब मंथरा दासियों के समूह की प्रमुख बनकर उनके साथ अयोध्या आई. कुछ ही समय में उसने कैकेयी के महल की सारी व्यवस्था संभाल ली.
मंथरा ने दिखाई थी चालाकी
रामायण ग्रंथ के अनुसार, एक दिन मंथरा ने देखा कि राजमहल को सजाया जा रहा है. उसने रास्ते में जा रहे एक व्यक्ति से इसका कारण पूछा. जब उसे पता चला कि भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारी हो रही है, तो वह चौंक गई. उसने तुरंत सोचा कि श्री राम की माता कौशल्या अब राजा की सबसे प्रिय रानी बन जाएंगी और ऐसे में उसका अपना प्रभाव भी खत्म हो जाएगा. यह सोचकर उसने कैकेयी को भड़काने का फैसला किया.
चालाकी से मंथरा ने कैकेयी को समझाया कि उनके अच्छे दिन खत्म होने वाले हैं और उन्हें रानी कौशल्या के सामने झुककर रहना पड़ेगा. उसने कहा कि, ''यहां तक कि भरत को भी राम का सेवक बनकर रहना पड़ेगा.'' मंथरा के उकसाने पर कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगे. उन्होंने कहा कि राम को 14 साल के लिए वनवास भेजा जाए और राजगद्दी भरत को दी जाए.
राजा दशरथ को अपने वचन निभाने पड़े, इसलिए राम वन के लिए चले गए. लेकिन राम से बिछड़ने का दुख राजा दशरथ सह नहीं पाए और उनके जाने के कुछ समय बाद ही उनका देहांत हो गया.
पहले जन्म में मंथरा थी यक्षिणी
पिछले जन्म में मंथरा एक यक्षिणी थी. एक बार कैकेय देश के राजा शिकार पर गए और उनके तीर से एक हिरण मर गया. उस हिरण की पत्नी रोती हुई अपनी मां के पास गई. अपनी बेटी का दुख देखकर यक्षिणी से रहा नहीं गया. उसने राजा से उस मरे हुए हिरण को देने के लिए कहा और बोली, 'मैं यक्षिणी हूं, मैं इसे फिर से जीवित कर सकती हूं.'
लेकिन, उस युवा राजा ने उसकी बात नहीं मानी और उस पर तलवार से वार कर दिया. मरते समय यक्षिणी ने भयानक श्राप दिया, 'जैसे तुमने मेरे निर्दोष दामाद की मृत्यु कराई है, वैसे ही मैं भी तुम्हारे दामाद की मृत्यु का कारण बनूंगी.' कहा जाता है कि वही यक्षिणी आगे चलकर मंथरा के रूप में जन्मी. उसे एक गंधर्वी, जिसका नाम दुंदुभी था, भी माना जाता है. इसी तरह, एक अन्य जन्म में वह कंस के राज्य में कुब्जा नाम की दासी के रूप में भी प्रकट हुई.
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