Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? नोट कर लें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का इंतजार सभी को है. इस बार का रक्षा बंधन बेहद खास है क्योंकि रक्षा बंधन पर ग्रहण का साया रहने वाला है. जानते हैं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण का समय और इससे जुड़े सभी जरूरी नियम.

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 जानते हैं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण का समय और इससे जुड़े सभी जरूरी नियम. जानते हैं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण का समय और इससे जुड़े सभी जरूरी नियम.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पावन पर्व रक्षाबंधन इस साल बेहद खास और चर्चाओं में है, क्योंकि इस बार पर्व की तारीख और खगोलीय घटनाओं को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं.  सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर पंचांग में क्या स्थिति है और किस समय भाई की कलाई पर राखी बांधना सबसे उत्तम रहेगा, आइए जानते हैं इसकी पूरी डिटेल. 

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रक्षाबंधन 2026 की सही तारीख और पूर्णिमा का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 की सुबह 09:08 बजे शुरू होगी . इसका समापन अगले दिन यानी 28 अगस्त 2026 की सुबह 09:48 बजे होगा. चूंकि उदया तिथि 28 अगस्त को प्राप्त हो रही है, इसलिए रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त 2026 को ही मनाया जाएगा. 

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त को बहनें सुबह-सुबह शुभ बेला में राखी बांध सकती हैं.  इस दिन राखी बांधने का सबसे उत्तम समय सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक रहेगा. खास बात यह है कि इस दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, जिससे दिन की शुरुआत से ही बिना किसी रुकावट के मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे. 

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इसके अलावा दिनभर के अन्य खास मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:28 से 05:12 तक

अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 तक

अमृत काल: शाम 07:44 से रात 09:23 तक

क्या चंद्र ग्रहण का रहेगा रक्षाबंधन पर कोई असर?
इस साल रक्षाबंधन के दिन यानी 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है. खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण सुबह 06:55 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा.  हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, जिस वजह से देश में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा,  इसका राखी के त्योहार या पूजा-पाठ पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. बहनें बिना किसी संकोच के पूरे दिन हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मना सकती हैं. 

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