Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त रक्षाबंधन कब है? पंडित ने पंचांग देखकर बताई सही तारीख

रक्षाबंधन की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस है. पूर्णिमा तिथि पर भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण भ्रम फैल गया है. हालांकि ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने बताया है कि इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाना उचित रहेगा.

Advertisement
28 अगस्त की सुबह 6:24 बजे से सुबह 9:48 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय रहेगा. (Photo: ITG) 28 अगस्त की सुबह 6:24 बजे से सुबह 9:48 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय रहेगा. (Photo: ITG)

प्रवीण मिश्र, ज्योतिषी

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:17 PM IST

रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है. यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है. हालांकि इस साल रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. ऐसे में लोग कन्फ्यूज हो गए हैं कि वो 27 अगस्त को रक्षाबंधन मनाएं या फिर 28 अगस्त को. इस बारे में ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने विस्तार से जानकारी दी है. आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन की सही तारीख क्या है.

Advertisement

कब है रक्षाबंधन?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने की सलाह दी गई है. भारतीय समयानुसार, इस दिन चंद्र ग्रहण सुबह 06:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा. हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. इसलिए चिंता करने की जरूरतन नहीं है.

राखी बांधने के 2 शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, 28 अगस्त की सुबह 6:24 बजे से सुबह 9:48 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय रहेगा. यह समय पूर्णिमा तिथि के दौरान रहेगा. अगर किसी कारण से सुबह राखी नहीं बांध पाएं  दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 1:05 बजे तक बताया गया है. यह अभिजीत मुहूर्त होगा. भाई-बहन अपनी सुविधा के अनुसार इन दोनों समय में से किसी एक में रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं.

Advertisement

रक्षाबंधन पर भद्रा का नहीं रहेगा असर
राखी बांधने को लेकर भद्रा को लेकर भी लोगों के मन में संशय रहता है. इस बार भद्रा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर रात 9:32 बजे समाप्त हो जाएगी. यानी 28 अगस्त को जब रक्षाबंधन मनाया जाएगा, तब भद्रा का समय समाप्त हो चुका होगा. ऐसे में बताए गए शुभ समय में राखी बांधने को लेकर भद्रा की बाधा नहीं रहेगी.

राखी बांधने की दिशा और पूजन विधि
राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह दी गई है. अगर यह संभव न हो तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ सकते हैं. बहन भाई के माथे पर तिलक लगाए और उसके साथ अक्षत यानी चावल भी लगाए. इसके बाद पहले मौली या रक्षा सूत्र बांधने की बात कही गई है. फिर पसंद की राखी बांधी जा सकती है. इसके बाद भाई की आरती उतारकर उसे मिठाई खिलाने की परंपरा निभाई जा सकती है. रक्षा सूत्र बांधते समय बहनें पारंपरिक मंत्र का उच्चारण कर सकती हैं. मंत्र है- “ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »