प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. दीपक लोधी ने शुक्रवार सुबह वृंदावन के बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी. घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने भी यही दावा किया. लेकिन मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कमरे से मिले ग्राइडंर ने इस घटना को एक नया मोड़ दे दिया. इस मामले पर अब उत्तराखंड के जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान सामने आया है.
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, 'देखिए! हम चातुर्मास में छत्तीसगढ़ के एक ग्रामीण इलाके में थे. कल ही वहां से निकलकर जब हम जबलपुर आए तो एक पत्रकार बंधु ने हमें इस घटना की जानकारी दी. उन्होंने मृतक के कमरे से एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर और किसी अंग के कटने से लहूलुहान होने की बात कही.'
शंकराचार्य ने आगे कहा कि यह सब चीजें सामने आने के बाद ऐसा मान लेना सही नहीं है कि वह लापरवाही से गिर गए या किसी ने उन्हें धक्का दे दिया. संभवत: इस घटना के पीछे और कोई और बात या वजह हो सकती है. तो यह सब जांच के बाद ही पता चलेगा. जांच के बाद सच्चाई सामने आनी चाहिए. इसमें कुछ भी गोल-गोल नहीं रहना चाहिए. ताकि किसी को अटकलें लगाने का मौका न मिले.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ग्राइंडर ने चौंकाया
इस मामले में पुलिस का कहना है कि दीपक लोधी की मौत का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, वो पहली नजर में देखने पर आत्महत्या ही लगती है. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट कटे होने और बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने की बात भी सामने आई है. हालांकि ये ब्लीडिंग किसी वजह से हुई है, इसके बारे में एक्सपर्ट ही बेहतर बता पाएंगे. फिलहाल पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है.
रविवार को पुलिस ने बताया था कि मृतक दीपक लोधी के कमरे से एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर बरामद हुआ है. ऐसे में प्राइवेट पार्ट के कटे होने और बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने की स्थिति में संदेह भी पैदा होता है. पुलिस ने बताया कि यह घटना कैसे और क्यों हुई, यह सब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा. रविवार को वृंदावन में दीपक लोधी का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
2024 में प्रेमानंद के आश्रम से जुड़ा था दीपक
दीपक लोधी के बहनोई सोनू पटेल ने इस मामले में एक बड़ा ही चौंकाने वाला खुलासा किया था. उन्होंने बताया कि दीपक साल 2024 में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े थे. तभी से लोग उसे रसिक दुलारी शरण कहने लगे थे. हालांकि जबसे उसने गुरु दक्षिणा ली, तबसे वो परिवार के संपर्क में नहीं था. आश्रम के लोगों ने कभी उसे परिवार से नहीं मिलने दिया. दीपक के घरवाले उससे मिलने की उम्मीद में दो-दो घंटे इंतजार करके लौट जाते थे. सोनू पटेल ने यह भी बताया था कि दीपक ने दो साल पहले ही फोन रखना भी बंद कर दिया था. इसलिए परिवार की उससे लंबे समय से बात नहीं हो रही थी.
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