'पढ़ाई में तेज, करना चाहता था नौकरी', जानें- कैसे प्रेमानंद से जुड़ा सुसाइड करने वाला दीपक

प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी ने शुक्रवार सुबह गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दीपक के प्राइटवेट पार्ट कटने और ओवर ब्लीडिंग से मौत की बात सामने आई. दीपक के परिजनों ने बताया कि दीपक पढ़ाई में बहुत तेज था और पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहता था. तभी अचानक वो प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया और भक्ति मार्ग पर निकल गया.

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दीपक साल 2024 में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा था. (Photo: ITG) दीपक साल 2024 में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा था. (Photo: ITG)

धीरज शाह

  • जबलपुर,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:55 PM IST

वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सुर्खियों में हैं.  दीपक ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे वृंदावन स्थित गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दीपक के प्राइटवेट पार्ट कटने और ओवर ब्लीडिंग से मौत की बात सामने आई. पुलिस को शुरुआती छानबीन में उसके कमरे से एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर भी बरामद हुआ है. इस घटना के बाद से दीपक का परिवार सदमे में है. दीपक प्रेमानंद महाराज के आश्रम से कैसे जुड़ा और उसका व्यवहार कैसा था, इसे बारे में परिवार के सदस्यों ने जानकारी दी है.

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दीपक मध्य प्रदेश के जबलपुर के गौर इलाके के परसवाड़ा गांव का रहने वाला था. वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ने के बाद उसे रसिक दुलारी शरण के नाम से एक नई पहचान मिली थी. दीपक की मौसी के लड़के बृजेश कुमार पटेल का बचपन उसके साथ ही बीता है. बृजेश कहते हैं, 'दीपक एक बेहद सीधा-सादा लड़का था और पढ़ाई में बहुत ही तेज था. वह किसी से कोई खास मतलब नहीं रखता था. उसका ध्यान सिर्फ पढ़ाई में था और वो नौकरी की तैयारी कर रहा था, ताकि अपने पैरों पर खड़ा हो सके. लेकिन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उसकी धार्मिक रुचि बढ़ने लगी. फिर वो भक्ति के मार्ग पर निकल गया और उसी में लगा रहा.'

2 साल से घर नहीं आया था दीपक
परिजनों ने बताया कि नर्मदा परिक्रमा करने के बाद दीपक वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया और वहीं रहने लगा. तभी से उसका संपर्क परिवार से नहीं रहा. एक बार वृंदावन आने के बाद दीपक जबलपुर वापस लौटे भी थे. लेकिन दो साल पहले जब वो वापस वृंदावन गए तो फिर कभी घर वापसी नहीं हुई. दीपक की मौत की खबर जब परिवार को मिली तो उसके घरवाले आनन-फानन में आश्रम पहुंचे, लेकिन वहां भी किसी ने उनसे मुलाकात नहीं की.

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इससे पहले दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने भी दीपक को लेकर कई अहम बातें बताई थीं. उन्होंने कहा था कि दीपक परिवार में सबसे अच्छा लड़का था. वह 2024 से प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा था. वृंदावन में गुरु दक्षिणा लेने के बाद से ही उसका परिवार से संपर्क खत्म था. आश्रम के लोगों ने कभी उसे परिवार के सदस्यों से मिलने नहीं दिया. परिजन 2-2 घंटे आश्रम के बाहर इंतजार करके लौट जाते थे. सोनू ने बताया कि दीपक अपने पास मोबाइल नहीं रखता था. इसलिए परिवार से उसकी कोई बातचीत भी नहीं हो पाती थी.

परिजनों ने की CBI जांच की मांग
इस घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस इसे आत्महत्या से जोड़कर देख रही है. लेकिन परिजन इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने मामले की CBI से निष्पक्ष जांच की मांग की है. फिलहाल पुलिस ने मौके से दीपक का सामान कब्जे में लिया है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही चोटों और मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति ज्यादा साफ हो सकेगी. 

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