October November 2026 Festival Dates: करवा चौथ, धनतेरस दिवाली! तुरंत नोट करें साल के सबसे बड़े त्योहारों की डेट

पितृपक्ष के बाद बैक-टू-बैक साल के सबसे बड़े बड़े त्योहारों की दस्तक होगी. शारदीय नवरात्र से लेकर करवा चौथ, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और भाई दूज जैसे बड़े त्योहार धूमधाम से देशभर में सेलिब्रेट किए जाएंगे. आइए अक्टूबर से नवंबर के बीच आने वाले साल के सबसे बड़े त्योहारों की तारीख जानते हैं.

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26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष रहेगा और फिर बैक-टू-बैक साल के सबसे बड़े बड़े त्योहारों की दस्तक होगी. (Photo: ITG) 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष रहेगा और फिर बैक-टू-बैक साल के सबसे बड़े बड़े त्योहारों की दस्तक होगी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

त्योहारों का मौसम चल रहा है. 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष रहेगा और फिर बैक-टू-बैक साल के सबसे बड़े बड़े त्योहारों की दस्तक होगी. शारदीय नवरात्र से लेकर करवा चौथ, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और भाई दूज जैसे बड़े त्योहार धूमधाम से देशभर में सेलिब्रेट किए जाएंगे. इनकी तैयारियों में लोग अभी से जुट गए हैं. त्योहारों की तारीख को ध्यान में रखते हुए लोग तेजी से ट्रेन, फ्लाइट की टिकटें बुक कर रहे हैं ताकि वो अपने परिवार के साथ इस फेस्टिव सीजन का आनंद उठा सकें. आइए जानते हैं कि अक्टूबर-नवंबर में आने वाले बड़े व्रत-त्योहार किस दिन-तारीख पर पड़ रहे हैं.

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शारदीय नवरात्रि: रविवार, 11 अक्टूबर
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि शुरू होती है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा. मान्यता है कि नवरात्र के पवित्र दिनों में नवदुर्गा के स्वरूप के विधिवत पूजन से मनचाहा वरदान प्राप्त किया जा सकता है.

दशहरा: मंगलवार, 20 अक्टूबर
दशहरे को विजयदशमी भी कहा जाता है. यह पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान राम की पूजा और उनके आदर्शों का स्मरण किया जाता है. दशहरे के दिन कई जगहों पर रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है.

करवा चौथ: गुरुवार, 29 अक्टूबर
करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने की परंपरा है. मान्यता है कि करवा चौथ का रखने से सुहागनों को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है.

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धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है. इस दिन भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. सोना-चांदी जैसी मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी को भी इस दिन शुभ माना जाता है. इसके अलावा, इस दिन धनिया, पीतल के बर्तन, झाड़ू, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदना भी शुभ माना जाता है.

नरक चतुर्दशी: शनिवार, 7 नवंबर
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन यमराज की पूजा और यम दीप जलाने का महत्व बताया गया है. मान्यता है कि यम दीप जलाने से आरोग्य और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है.

दिवाली: रविवार, 8 नवंबर
दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है. यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार लक्ष्मी-गणेश की पूजा से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि आती है. दिवाली हिंदू समुदाय के लोगों के लिए साल का सबसे बड़ा पर्व भी माना जाता है. इस दिन लोग घरों को अच्छे से सजाते हैं और शाम के समय परिवार के सभी सदस्य मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं.

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गोवर्धन: पूजा मंगलवार, 10 नवंबर
दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है. फिर विधि-विधान से पूजा की जाती है. यह पर्व भगवान कृष्ण की उस लीला से जुड़ा है, जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था.

भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर
भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं. साथ ही उनके सुख, समृद्धि और भाग्योदय की कामना करती हैं.

छठ पूजा: (13 से 16 नवंबर 2026)
हर साल देशभर में छठ पूजा का महापर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह उत्सव 4 दिनों तक चलता है. इस साल छठ का महापर्व 14 नवंबर से लेकर 16 नवंबर तक मनाया जाएगा.  13 नवंबर को नहाय-खाए होगा. फिर 14 नवंबर को खरना होगा. तीसरी दिन यानी 15 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद 16 नवंबर को अंतिम दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा.

देवउठनी एकादशी: शुक्रवार, 20 नवंबर
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं. इसके बाद शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का समय माना जाता है. इसी के साथ विवाह आदि मांगलिक आयोजनों का सिलसिला भी शुरू होने की मान्यता है.

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