Mahashivratri 2026: आज महाशिवरात्रि की शाम रहेगा भद्रा का साया, नोट करें शुभ मुहूर्त

Mahashivratri 2026: देशभर में आज महाशिवरात्रि की धूम है. सुबह से ही शिवालयों में 'हर-हर महादेव' की गूंज है. भक्त कतारों में लगकर जलाभिषेक कर रहे हैं. हालांकि, ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज शाम से भद्रा का साया शुरू होने जा रहा है, जो कल सुबह तक बना रहेगा.

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भद्रा के साये में महाशिवरात्रि भद्रा के साये में महाशिवरात्रि

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

Mahashivratri 2026: महादेव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व 'महाशिवरात्रि' आज मनाया जा रहा है. आज मनाई जा रही 'महाशिवरात्रि' विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच पड़ी है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार भक्तों के लिए थोड़ा संशय लेकर आया है, क्योंकि इस पावन अवसर पर 'भद्रा काल' का साया भी है. अक्सर भद्रा को शुभ कार्यों में वर्जित माना जाता है, जिससे श्रद्धालुओं के मन में जलाभिषेक और पूजा के समय को लेकर कई सवाल हैं. आइए जानते हैं क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र और क्या रहेंगे पूजा के सटीक मुहूर्त. 

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भद्रा का साया: क्या प्रभावित होगी पूजा?
ज्योतिष गणना के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भद्रा काल 15 फरवरी की शाम 5:04 बजे से शुरू होकर अगले दिन 16 फरवरी की सुबह 5:23 बजे तक रहेगा.  धार्मिक मान्यताओं में भद्रा के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन शिव भक्तों के लिए राहत की बात यह है कि इस बार भद्रा का वास 'पाताल लोक' में है. शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा पाताल या स्वर्ग लोक में होती है, तो उसका अशुभ प्रभाव पृथ्वी वासियों पर नहीं पड़ता.  इसलिए, भक्त बिना किसी भय या संशय के पूरी रात महादेव का जलाभिषेक, उपवास और अनुष्ठान कर सकते हैं. 

चतुर्दशी तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत आज 15 फरवरी को रखा जा रहा है. चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे से होगी.  इसका समापन 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे होगा. 

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दिन के जलाभिषेक के लिए मुख्य समय 

प्रथम मुहूर्त सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक रहेगा. द्वितीय मुहूर्त सुबह 9:48 से 11:11 बजे तक रहेगा. तृतीय मुहूर्त सुबह 11:11 से दोपहर 12:35 बजे तक होगा. 

चार प्रहर की पूजा
महाशिवरात्रि पर 'चार प्रहर' की पूजा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. जो भक्त पूरी रात जागरण करना चाहते हैं उनके लिए समय और विधि इस तरह है. 

प्रथम प्रहर शाम 6:39 से रात 9:45 तक रहेगा.  संध्या काल में शुरू होने वाली इस पूजा में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जाता है.  यह मानसिक शांति और भक्ति की शुरुआत का समय है.

द्वितीय प्रहर रात 9:45 से मध्यरात्रि 12:52 तक रहेगा.  रात के बढ़ते पहर में महादेव को दही अर्पित करने का विधान है.  यह प्रहर जीवन के विकारों को दूर करने वाला माना जाता है.

तृतीय प्रहर मध्यरात्रि 12:52 से रात 3:59 तक होगा.  आधी रात के इस गहन समय में घी से अभिषेक किया जाता है.  घी के अर्पण से आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. चतुर्थ प्रहर सुबह 3:59 से 7:06  तक रहेगा.

ब्रह्म मुहूर्त के करीब इस अंतिम प्रहर में शिवजी को शहद चढ़ाया जाता है.  यह प्रहर मोक्ष और साधना की सिद्धि का समय होता है. 

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निशिता काल: सबसे शक्तिशाली समय
महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण पूजा 'निशिता काल' में मानी जाती है.  साल 2026 में निशिता काल की पूजा का समय मध्यरात्रि 12:28 बजे से 1:17 बजे तक रहेगा.  मान्यता है कि इसी समय भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस समय की गई पूजा तुरंत फलदायी होती है.

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