Garuda Purana: 16 संस्कारों का ज्ञान, फिर क्यों गरुड़ पुराण के नाम से डर जाते हैं लोग?

गरुड़ पुराण को केवल मृत्यु का ग्रंथ मानना इसके व्यापक स्वरूप को सीमित कर देना है. मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का वर्णन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर है. लेकिन इसका उद्देश्य केवल भय उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि कर्म और उसके परिणाम के प्रति मनुष्य को जागरूक करना भी है.

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मृत्यु के समय पढ़ा जाने वाला मृत्यु कल्प गरुड़ पुराण का मात्र एक छोटा सा भाग है. (Photo: ITG) मृत्यु के समय पढ़ा जाने वाला मृत्यु कल्प गरुड़ पुराण का मात्र एक छोटा सा भाग है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

गरुड़ पुराण का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सिर्फ मृत्यु, कर्मों का फल और यमलोक ही आता है. कुछ ऐसे दृश्य आंखों के सामने घूमने लगते हैं जो मृत्यु के बाद यमलोक में मृत आत्मा को भोगने पड़ते हैं. जबकि गरुड़ पुराण सिर्फ अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक जीव के जन्म से लेकर मृत्यु तक किए जाने वाले सभी 16 संस्कारों का व्यापक रूप है. जिसे हमें कभी बताया या पढ़ाया ही नहीं जाता है. आइए आज इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

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गरुड़ पुराण में मनुष्य के जीवन, धर्म, आचार-विचार, पूजा-पद्धति, दान, संस्कार, ज्योतिष, चिकित्सा, नीति और मोक्ष तक से जुड़े अनेक विषयों का वर्णन मिलता है. इनमें जीवन के विभिन्न पड़ावों से जुड़े संस्कारों का ज्ञान भी महत्वपूर्ण है, जिसे आज की पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है. मृत्यु के समय पढ़ा जाने वाला मृत्यु कल्प गरुड़ पुराण का मात्र एक छोटा सा भाग है. गरुड़ पुराण में 250 से अधिक अध्याय हैं. इसलिए 16 अध्याय वाला पाठ पूरे गरुड़ पुराण का 16 अध्यायों का संस्करण नहीं है, बल्कि मृत्यु, प्रेत, यम मार्ग और अंतिम संस्कार से संबंधित एक संक्षिप्त पाठ है.

गर्भ से लेकर मृत्यु के बाद तक का वर्णन
विशेष रूप से आचार खण्ड में गर्भ से लेकर बाल्यावस्था और आगे के जीवन से जुड़े संस्कारों का वर्णन है. गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन जैसे संस्कारों के माध्यम से गर्भधारण और गर्भावस्था भी धार्मिक एवं संस्कारपूर्ण जीवन का हिस्सा है. शिशु के जन्म के बाद नामकरण, बच्चे को घर से बाहर ले जाने से संबंधित निष्क्रमण, अन्न ग्रहण कराने का अन्नप्राशन और बालों से संबंधित चूड़ाकर्म जैसे संस्कारों का विधान बताया गया है. इन संस्कारों के पीछे केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि जीवन के एक चरण से दूसरे चरण में प्रवेश की सांस्कृतिक भावना भी जुड़ी हुई है.

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इसलिए गरुड़ पुराण को केवल मृत्यु का ग्रंथ मानना इसके व्यापक स्वरूप को सीमित कर देना है. मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का वर्णन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर है. लेकिन इसका उद्देश्य केवल भय उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि कर्म और उसके परिणाम के प्रति मनुष्य को जागरूक करना भी है. इसके संदेश में बार-बार यह भाव आता है कि मनुष्य को जीवन रहते धर्म, सदाचार, दान, सेवा और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए.

आज लोगों को 16 संस्कारों के नाम तक की जानकारी नहीं है. मनुष्य का जीवन जन्म से मृत्यु तक संस्कारों और कर्तव्यों की एक यात्रा है. मृत्यु इस यात्रा का अंत है, लेकिन संस्कार उस जीवन को दिशा देने का माध्यम हैं. इसलिए गरुड़ पुराण को केवल मृत्यु के समय डराने वाला ग्रंथ समझना उसके वास्तविक और व्यापक स्वरूप को भूल जाना है.

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