Ganesh Visarjan 2026: कल या परसों, कब होगा बाप्पा का विसर्जन? यहां से दूर करें तिथि का कंफ्यूजन

Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर तक रहेगी. प्रातःकाल सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक विसर्जन का बेहद शुभ मुहूर्त है. जानें पूरे दिन के चौघड़िया मुहूर्त और पूजा विधि.

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गणेश विसर्जन 2026 (Photo: ITG) गणेश विसर्जन 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन हिंदू धर्म की एक बेहद पवित्र परंपरा है. गणेश चतुर्थी के दिन जब भगवान श्री गणेश (गणपति बाप्पा) की मूर्ति को घर या सार्वजनिक पंडालों में स्थापित किया जाता है, तो कुछ दिनों तक उनकी पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इसके बाद, तय तिथि (जैसे डेढ़ दिन, 3, 5, 7, 10 या 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी) पर बाप्पा की मूर्ति को जल (नदी, तालाब, समुद्र या कुंड) में प्रवाहित (विसर्जित) कर दिया जाता है. इसी प्रक्रिया को गणेश विसर्जन कहा जाता है.

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गणेश विसर्जन 2026 तिथि (Ganesh Visarjan 2026 Tithi)

द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर यानी कल रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा. 

गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त (Ganesh Visarjan 2026 Shubh Muhurat)

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर 10 बजकर 42 मिनट तक

अपराह्न मुहूर्त (चर) - शाम 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक

अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक

रात्रि मुहूर्त (लाभ) - रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - रात 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26

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गणेश जी विसर्जन की विधि क्या है?

उत्तरपूजा और अंतिम भोग

विसर्जन से पहले पूजा स्थान पर बाप्पा की अंतिम पूजा (उत्तरपूजा) की जाती है. गणेश जी को रोली-चंदन का तिलक लगाएं, 21 दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें. इसके बाद मोदक या लड्डू का भोग लगाकर पूरे परिवार के साथ आरती उतारें.

विदाई की पोटली और क्षमा प्रार्थना

एक लाल कपड़े में थोड़ा अक्षत, दूर्वा, सिक्के और मोदक बांधकर बाप्पा की प्रतिमा के पास रखें. इसके बाद हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर से जल्दी आने की प्रार्थना करें.

स्थान परिवर्तन और प्रस्थान

क्षमा याचना के बाद जयकारों के साथ प्रतिमा को चौकी सहित 2 इंच आगे खिसका दें, जो विसर्जन की अनुमति का प्रतीक है. इसके बाद बाप्पा को लकड़ी की चौकी पर विराजमान कर गुलाल उड़ाते और "गणपति बाप्पा मोरया" के जयकारे लगाते हुए प्रस्थान करें.

जल विसर्जन और प्रसाद वितरण

विसर्जन स्थल या घर पर ही पानी से भरे टब में बाप्पा की मिट्टी की प्रतिमा को आदरपूर्वक धीरे-धीरे जल में विसर्जित करें. विसर्जन संपन्न होने के बाद घर लौटकर पूजा स्थान को प्रणाम करें और सभी में बाप्पा का प्रसाद वितरित करें.

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