Chaturmas 2026: आज 25 जुलाई 2026, शनिवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पावन देवशयनी एकादशी है. इसी के साथ आज से चार महीनों के लिए चातुर्मास का आरंभ हो चुका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन से जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में चार महीने के लिए योग निद्रा में लीन हो जाते हैं. भगवान के सोने के बाद से ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि थम जाते हैं.
चातुर्मास के ये चार महीने (आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) आध्यात्मिक साधना, व्रत, संयम और पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम माने गए हैं. इन चार महीनों में भगवान विष्णु के साथ-साथ भोलेनाथ की भी विशेष कृपा पाने का अवसर मिलता है. हालांकि, इन चार महीनों के दौरान नकारात्मक ऊर्जा से बचने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है. आइए जानते हैं कि चातुर्मास के दौरान किन 5 कामों से पूरी तरह बचना चाहिए और किन उपायों से जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं:
चातुर्मास में भूलकर भी न करें ये 5 काम
मांगलिक कार्यों की मनाही: चातुर्मास की अवधि में विवाह, सगाई, उपनयन संस्कार, मुंडन और नया घर खरीदने या प्रवेश करने जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं. चूंकि इस दौरान देवता शयन मुद्रा में होते हैं, इसलिए किसी भी बड़े अनुष्ठान या मांगलिक आयोजन की शुरुआत नहीं की जाती है.
खानपान में रखें विशेष संयम: आयुर्वेद और धर्म दोनों की दृष्टि से चातुर्मास के दौरान खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इन चार महीनों में मानसून और मौसम के बदलाव के कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है. इसलिए इस दौरान हरी पत्तेदार सब्जियां, बैंगन, मूली, और तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज, मांस, मदिरा) का सेवन करने से बचना चाहिए. इसके अलावा सेहत और सात्विकता बनाए रखने के लिए दूध, दही और शहद के सेवन से जुड़े खास नियम भी अपनाए जाते हैं.
जमीन पर सोने की परंपरा: चातुर्मास के दौरान कई लोग विलासिता और आराम का त्याग करके जमीन पर चटाई या बिस्तर बिछाकर सोते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मन में अहंकार समाप्त होता है, संयम बढ़ता है.
क्रोध और झूठ से दूरी: इन चार महीनों में व्यक्ति को अपने मन, वाणी और कर्म पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए. किसी भी प्रकार का झूठ बोलने, दूसरों की निंदा करने, चुगली करने या किसी पर भी अनावश्यक क्रोध करने से बचना चाहिए. इस दौरान भगवान का ध्यान और सात्विक जीवन जीने पर जोर दिया जाता है.
यात्रा और फिजूलखर्ची पर लगाम: प्राचीन काल से यह परंपरा रही है कि चातुर्मास के दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर तपस्या करते हैं (जिसे चातुर्मास व्रत कहा जाता है). आम लोगों के लिए भी इस दौरान लंबी और अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है. साथ ही धन का संचय करने और फिजूलखर्ची से दूर रहने का यह समय माना गया है.
चातुर्मास के विशेष उपाय
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने, नकारात्मक ऊर्जा दूर करने और जीवन में आ रही बाधाओं से बचने के लिए ये अचूक उपाय जरूर करें:
विष्णु सहस्रनाम का पाठ: चातुर्मास के इन चार महीनों में नियमित रूप से भगवान विष्णु के मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें और प्रतिदिन या हर गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.
तुलसी की पूजा और दीया: शाम के समय रोज तुलसी के पौधे के सामने घी का दीया जला कर तुलसी की परिक्रमा करें. धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में तुलसी की पूजा करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होकर घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती है.
पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और बेसन के लड्डू या चने की दाल का भोग लगाएं. साथ ही जरूरतमंदों को पीली वस्तुएं, हल्दी, पीले वस्त्र या चने की दाल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है.
एकादशी व्रत और अनुष्ठान: चातुर्मास के दौरान आने वाली सभी एकादशी तिथियों (जैसे देवशयनी आदि) पर व्रत रखें. एकादशी के दिन भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें. गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन व दान दें.
सात्विक जीवन और गौसेवा: इन चार महीनों में नियमित रूप से गाय को पहली रोटी खिलाएं. चीटियों को आटा व चीनी दें. ऐसा करने से समस्त पापों का नाश होने के साथ पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
aajtak.in