चातुर्मास (Chaturmas) हिंदू धर्म में शयनी एकादशी (जून-जुलाई) से शुरू होकर प्रबोधिनी एकादशी (अक्टूबर-नवंबर) पर समाप्त होती है. यह चार महीनों की एक पवित्र अवधि है. साल 2024 में यह 17 जुलाई से प्रारंभ होकर 12 नवंबर तक चलेगा है. चातुर्मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में चला जाता है. ये चार महीने सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के होते हैं. इन महीनों में चार देवी-देवताओं की विशेष कृपा मिलती है.
Devshayani Ekadashi 2026: ज्योतिषीय गणना के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर बन रहे ग्रहों के इस दुर्लभ संयोग से कुछ राशियों के लिए आने वाले चार महीने बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी 2026 से चातुर्मास का आरंभ हो चुका है. भगवान विष्णु की योगनिद्रा के इन 4 महीनों में किन 5 कामों से बचना चाहिए और जीवन में सुख-शांति के लिए क्या अचूक उपाय करने चाहिए.
25 जुलाई से लेकर 20 नवंबर तक चातुर्मास रहेगा. इस बार चातुर्मास में भगवान विष्णु 119 दिन योग निद्रा में रहेंगे. 119 दिन की इस अवधि में मांगलिक कार्य आदि नहीं किए जाएंगे, लेकिन 15 बड़े व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे.
Chaturmas 2026: चातुर्मास जिसका अर्थ है चार महीने. हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु की शयन अवस्था यानी योग निद्रा का समय है. चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्म-संयम, साधना और स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है. यह समय धार्मिक आस्था को गहरा करने का होता है.
Chaturmas 2026: चातुर्मास 2026 की शुरुआत 25 जुलाई से हो रही है, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं. इस दौरान कई शुभ कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भक्ति, व्रत और संयम से जीवन में सुख-समृद्धि लाई जा सकती है. जानें क्या करें और क्या न करें.
चातुर्मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और भौतिक जीवन से जुड़े मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है. हालांकि पूजा, साधना, जप-तप और ईश्वर आराधना के लिए यही समय सबसे फलदायी माना जाता है. इस बार चातुर्मास 25 जुलाई से 20 नवंबर तक रहेगा और इसमें सावन, भाद्रपद, आश्विन तथा कार्तिक चार पवित्र महीने शामिल हैं.
Shani Vakri & Chaturmas Sanyog 2026: न्याय के देवता शनि देव 27 जुलाई 2026 से मीन राशि में वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं. चातुर्मास के दौरान शनि का यह उग्र रूप 11 दिसंबर तक रहेगा. जानें सभी 12 राशियों पर इसका क्या असर पड़ेगा और अशुभ प्रभावों से बचने के क्या उपाय हैं.
हिंदू पंचांग के मुताबिक, वर्ष 2026 में आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 09:14 बजे होगा. यह तिथि 25 जुलाई को सुबह 11:36 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी.
Devshayani Ekdashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू हो रहा चातुर्मास 4 राशियों के जीवन में स्वर्णिम दिन लेकर आ रहा है. भगवान विष्णु के योग निद्रा में कुछ राशियां करियर में बड़ी छलांग, बिजनेस में अचानक बंपर धन लाभ और समाज में भारी मान-सम्मान मिलने का विशेष वरदान मिलेगा.
धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, तब विवाह, मुंडन, जनेऊ और अन्य शुभ संस्कारों का आयोजन नहीं किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस समय किए गए मांगलिक कार्यों को भगवान का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है. इसलिए इन चार महीनों में लोग धार्मिक साधना, व्रत, पूजा और आत्मचिंतन पर अधिक ध्यान देते हैं.
इस साल चातुर्मास 25 जुलाई से लेकर 20 नवंबर तक रहने वाला है. है. ज्योतिषविदों का कहना है कि चार महीने की यह अवधि पांच राशियों के लिए बहुत शुभ मानी जा रही है. इन राशियों के जीवन में नई खुशियों का संचार होगा और धनधान्य की स्थिति बेहतर होगी.
Chaturmas 2026: 25 जुलाई से शुरू हो रहा चातुर्मास पूरे देश में शुभ कार्यों पर विराम लगाने आ रहा है. भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाते ही सावन से कार्तिक तक भोजन, शयन और ब्रह्मचर्य के कड़े नियम लागू हो जाएंगे.
Chaturmas 2026: हर वर्ष चातुर्मास देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है. ये महीने बहुत ही पवित्र माने जाते हैं, जिसमें भगवान विष्णु विश्राम करते हैं. तो चलिए इस महीने की तिथि और महत्व जानते हैं.
Chaturmas 2026: 25 जुलाई से सनातन धर्म का सबसे पवित्र समय चातुर्मास शुरू हो रहा है. अगले 119 दिनों तक भगवान विष्णु पाताल लोक में रहेंगे, जिसके कारण सभी शुभ कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा. इस दौरान भूलकर भी की गई एक छोटी सी गलती आपको भारी पड़ सकती है. जानें चातुर्मास के ये कड़े नियम.
व्रत-परंपरा और त्योहार भी सिर्फ एक खास दिन के आयोजन की तरह बीतने लगे हैं और इसके पीछे के विज्ञान को न समझ पाने के कारण हम इसके वास्तविक लाभ से अछूते रह रहे हैं. विडंबना ये है कि आजकल इन तिथियों और उनके व्रतों के पालन का भी चलन बढ़ गया है, लेकिन जिस सिद्धांत के आधार पर इन व्रत-परंपराओं को बनाया गया रहा होगा, वो सिद्धांत ही इन परंपराओं से खो चुका है.
Devshayani Ekadashi 2025: इस बार देवशयनी एकादशी का व्रत 6 जुलाई 2025, रविवार को रखा जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को हर साल देवशयनी एकादशी मनाई जाती है. देवशयनी एकादशी के दिन चातुर्मास की भी शुरुआत होती है.
Chaturmas 2024 Date: चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक माह शामिल होते हैं. चातुर्मास लगने के बाद शुभ व मांगलिक कार्य जैसे मुंडन संस्कार, विवाह, तिलक, यज्ञोपवीत जैसे 16 संस्कार बंद हो जाते हैं.
Vivah Muhurat 2024: इस बार देवशयनी एकादशी 17 जुलाई दिन बुधवार को पड़ रही है. इस दिन से भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे और तब से ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी. इसके बाद चार महीनों तक सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे. तो आइए जानते हैं कि देवशयनी एकादशी तक कौन से खास मुहूर्त हैं.