Karwa Chauth 2026: दिल्ली-NCR में बादलों ने ढका चांद, कैसे खोलें करवा चौथ का व्रत?

Karwa Chauth 2026: दिल्ली-NCR में बादलों के कारण करवा चौथ पर चांद नहीं दिख रहा है? जानें चंद्र दर्शन न होने पर व्रत कैसे खोलें और पूजा-पारण के क्या हैं पारंपरिक तरीके.

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जानें चंद्र दर्शन न होने पर व्रत कैसे खोलें और पूजा-पारण के क्या हैं पारंपरिक तरीके. जानें चंद्र दर्शन न होने पर व्रत कैसे खोलें और पूजा-पारण के क्या हैं पारंपरिक तरीके.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

Karwa Chauth Chand Darshan: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए शाम होते ही चांद का इंतजार बढ़ गया है. दिल्ली-NCR में बारिश और आसमान में छाए बादलों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर चंद्रमा दिखाई नहीं दिया, तो व्रत कैसे खोलें? दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रोदय का इंतजार कर रही हैं, लेकिन खराब मौसम ने चिंता बढ़ा दी है. 

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करवा चौथ पर परंपरागत रूप से चंद्रमा को अर्घ्य देने, पूजा करने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद व्रत खोला जाता है.  ऐसे में अगर आपके शहर में चांद बादलों के पीछे छिपा है, तो घबराने के बजाय पहले चंद्रोदय का समय देखें और मौसम साफ होने का इंतजार करें.  अगर इसके बाद भी चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पाते, तो अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आगे की विधि अपनाएं. 

चांद नहीं दिखे तो इन तरीकों से खोल सकती हैं व्रत
चंद्रोदय का समय बीतने पर क्या करें?

दिल्ली में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:17 बजे बताया गया है, जबकि नोएडा में करीब 8:16 बजे और गुरुग्राम में 8:18 बजे चांद निकलने की संभावना है.  हालांकि, घने बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है.  

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अगर निर्धारित समय के बाद भी चांद नजर नहीं आता है, तो पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय देखकर चंद्र देव का स्मरण कर सकती हैं.  कुछ धार्मिक मान्यताओं में ऐसी स्थिति में चंद्रमा के उदय की दिशा में अर्घ्य देने और प्रार्थना करने का विकल्प बताया गया है. 

पति का चेहरा देखकर खोल सकती हैं व्रत?
कुछ मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर महिलाएं अपने पति का चेहरा देखकर और उनके हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोल सकती हैं.  इसके साथ चंद्र देव का स्मरण और प्रतीकात्मक पूजा भी की जा सकती है.  हालांकि, यह सभी परंपराओं में एक जैसा नियम नहीं है.  

चांद की तस्वीर या प्रतीकात्मक आकृति से करें पूजा
एक अन्य पारंपरिक विकल्प के तौर पर चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर या भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण करके पूजा की जा सकती है.  निर्धारित चंद्रोदय समय के बाद प्रार्थना और अर्घ्य की विधि अपनी मान्यता के अनुसार पूरी करें.  

ऐसे में दिल्ली-NCR की महिलाओं को सलाह है कि वे बादलों के कारण घबराएं नहीं.  पहले चंद्रोदय का समय देखें और मौसम साफ होने का इंतजार करें.  यदि चंद्रमा के दर्शन संभव न हों, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलने का निर्णय लें.  दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद पारण करते समय पहले थोड़ा पानी पिएं और फिर हल्का भोजन करें. 

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