Bhai Dooj 2026: हिंदू धर्म में भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाई दूज का संबंध सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते से ही नहीं, बल्कि मृत्यु के देवता यमराज और उनके लेखाधिकारी भगवान चित्रगुप्त से भी है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा हिसाब रखते हैं. यही वजह है कि भाई दूज के दिन उनकी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है. आइए जानते हैं कौन हैं भगवान चित्रगुप्त और क्यों की जाती है भाई दूज पर उनकी पूजा.
कौन हैं भगवान चित्रगुप्त?
भगवान चित्रगुप्त को यमराज का लेखाधिकारी माना जाता है. उनका काम मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखना है. मान्यता है कि इंसान अपने जीवन में जो भी कर्म करता है, उसका पूरा हिसाब भगवान चित्रगुप्त के पास रहता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, मृत्यु के बाद जब किसी जीव की आत्मा यमलोक पहुंचती है, तब उसके कर्मों का हिसाब देखा जाता है. इसी आधार पर उसके अगले जीवन और फल का निर्णय होता है. भगवान चित्रगुप्त को हाथों में कलम, दवात और बही-खाता लिए हुए दिखाया जाता है. इन्हीं के जरिए वे हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं.
कैसे हुई थी भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार यमराज ने भगवान ब्रह्मा से कहा कि मनुष्यों के कर्मों का हिसाब रखने और उसका रिकॉर्ड तैयार करने के लिए उन्हें एक सहायक की जरूरत है. इसके बाद ब्रह्मा जी ध्यान में लीन हो गए. कहा जाता है कि लंबे समय तक ध्यान करने के बाद उनकी काया से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए. चूंकि उनका जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ था, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा. ब्रह्मा जी ने उन्हें मनुष्यों के कर्मों का हिसाब रखने का दायित्व सौंपा. तभी से उन्हें यमराज के लेखाधिकारी के रूप में पूजा जाता है.
भाई दूज पर क्यों होती है चित्रगुप्त पूजा?
भाई दूज के दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने की भी परंपरा है. खासतौर पर कायस्थ समाज में इस दिन चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व होता है. इस अवसर पर लोग कलम, दवात, बही-खाते और लेखन से जुड़ी चीजों की पूजा करते हैं.
मान्यता है कि इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने से बुद्धि, ज्ञान और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है. कई जगहों पर लोग अपनी नई कलम से शुभ काम की शुरुआत भी करते हैं.
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