आज देशभर में माताएं अपने संतान की रक्षा और खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं. इस दिन महिलाएं अहोई माता यानी मां पार्वती की पूजा करती हैं. वे अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत रख सकती हैं. जिनकी संतान को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी रहती है, वे भी यह व्रत करती हैं. मान्यता है कि इस दिन पूजा और विशेष उपाय करने से संतान का कल्याण होता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. वहीं, तारे निकलने का समय सूरज ढलने के बाद शाम 6 बजे के बाद बताया गया है. अहोई अष्टमी पर चंद्रोदय रात 11 बजकर 40 मिनट पर होगा.
पूजन सामग्री
अहोई अष्टमी पर दीवार पर गेरू या लाल रंग से अहोई माता की आकृति बनाएं. सूर्यास्त के बाद तारे दिखने पर पूजा शुरू करें. पूजा के लिए ये सामग्री रखें.
- चांदी या सफेद धातु की अहोई माता
- चांदी के मोतियों की माला
- जल से भरा कलश
- दूध-चावल और हलवा
- फूल और दीपक
पूजन विधि
सबसे पहले अहोई माता को रोली, फूल और दीपक अर्पित करें. फिर दूध-चावल का भोग लगाएं. इसके बाद हाथ में गेहूं के सात दाने और दक्षिणा लेकर व्रत कथा सुनें. कथा पूरी होने पर चांदी की माला पहन लें. फिर चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करें. मान्यता के अनुसार, इस माला को दीपावली के दिन उतारना चाहिए. उस पर जल के छींटे डालकर सुरक्षित रख दें.
अहोई अष्टमी व्रत के नियम
- बिना स्नान किए पूजा न करें.
- काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा न करें.
- किसी भी जीव-जंतु को नुकसान न पहुंचाएं.
- हरे-भरे पेड़-पौधों को न तोड़ें.
- पूजा में इस्तेमाल की गई पुरानी सामग्री दोबारा न चढ़ाएं.
- मुरझाए फूल और पुरानी मिठाई का इस्तेमाल न करें.
अहोई अष्टमी पर संतान के लिए खास उपाय
पढ़ाई और करियर
अगर संतान की पढ़ाई या करियर में परेशानी आ रही है, तो अहोई माता को दूध-चावल और लाल फूल चढ़ाएं. इसके बाद हाथ में लाल फूल लेकर संतान की तरक्की की प्रार्थना करें. फिर संतान को अपने हाथों से दूध-चावल खिलाएं. लाल फूल उसे देकर सुरक्षित रखने के लिए कहें.
सुख-शांति के लिए
अगर संतान के पारिवारिक जीवन में तनाव है, तो अहोई माता को गुड़ का भोग लगाएं. साथ ही चांदी की चेन अर्पित करें. इसके बाद मां पार्वती के मंत्र 'ॐ ह्रीं उमायै नमः' का 108 बार जाप करें. फिर संतान को गुड़ खिलाएं. अपने हाथों से उसके गले में चेन पहनाएं और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दें.
अच्छी सेहत के लिए
संतान की अच्छी सेहत के लिए अहोई माता को पीले फूलों की माला चढ़ाएं. पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ जूं सः' मंत्र का 11 बार जाप करें. चाहें तो मन ही मन भी मंत्र जप सकते हैं. इसके बाद माता को धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. मौसमी फल का भोग लगाएं. पूजा के समय क्रोध करने से बचें. प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलें.
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