Hanuman Ansh Movie: 7 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' अपने रिकॉर्ड्स की वजह से पूरे देश में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है. महान संत नीम करोली बाबा के शुरुआती जीवन, उनकी कठोर साधना और भक्ति के पावन सफर पर आधारित यह फिल्म दर्शकों के दिलों को सीधे छू रही है. (Photo: ITG)
वैसे तो नीम करोली बाबा के भक्त पूरे भारत में मौजूद हैं. लेकिन सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश के एक गांव से शुरू हुई नीम करोली बाबा की ख्याति सात समंदर पार अमेरिका तक कैसे पहुंची? (Photo: ITG)
हार्वर्ड के प्रोफेसर की जिंदगी कैसे बदली?
साल 1967 में अमेरिका के एक व्यक्ति रिचर्ड अल्बर्ट भारत आए थे. वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे. वह एलएसडी समेत साइकेडेलिक पदार्थों पर अपने प्रयोगों के कारण विवादों में भी रहे और बाद में हार्वर्ड से अलग हो गए थे. (Photo: ITG)
फिर, वह भारत यात्रा के दौरान कैंची धाम पहुंचे और नीम करौली बाबा से मिले. भक्तों और राम दास की पुस्तकों में वर्णित एक प्रसंग के अनुसार, बाबा ने उनकी मां की बीमारी से जुड़ी ऐसी बात बताई, जिसके बारे में रिचर्ड ने भारत में किसी को नहीं बताया था. यह सुनकर वह भावुक हो गए थे. (Photo: ITG)
कहा जाता है कि रिचर्ड के मन में फिर भी संदेह था. उनकी जेब में एलएसडी की गोलियां थीं. इसी दौरान बाबा ने खुद उनसे गोलियां मांगीं. (Photo: ITG)
कथा के अनुसार, बाबा ने गोलियां लेने के बाद भी सामान्य रूप से बातचीत जारी रखी और उन पर किसी तरह का असर दिखाई नहीं दिया. यह घटना रिचर्ड अल्बर्ट के लिए बेहद प्रभावशाली साबित हुई. (Photo: ITG)
आगे चलकर रिचर्ड अल्बर्ट का नाम राम दास हो गया. उन्होंने बाद में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Be Here Now लिखी, जिसने पश्चिमी देशों में भारतीय आध्यात्मिकता के प्रति लोगों की रुचि को काफी बढ़ाया. (Photo: ITG)