IIT कानपुर से पढ़ाई की. UPSC की परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बने. राजस्थान सरकार में बड़े-बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाली. करियर में एक के बाद एक अहम पद मिले. लेकिन अब चर्चा 40 विला-कॉटेज की खरीद की है. राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के परिवार की ओर से करीब ढाई साल में 40 विला-कॉटेज खरीदे जाने की खबर सामने आई है. इन संपत्तियों की कुल कीमत 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है. खरीद के साथ ही इन्हें बेचने वाली कंपनी को लीज पर देने के दस्तावेज भी रजिस्टर्ड कराए गए. इससे परिवार को हर साल 1 करोड़ 80 लाख रुपये की लीज राशि मिलनी तय हुई.
इसी बीच राजस्थान सरकार ने शिखर अग्रवाल को APO यानी Awaiting Posting Orders की स्थिति में रख दिया है. इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें नई पोस्टिंग का इंतजार करना होगा. हालांकि, सरकार के आदेश में APO किए जाने की वजह प्रशासनिक बताई गई है. संपत्ति खरीद के मामले को ही इस कार्रवाई की वजह बताया गया हो, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. आखिर शिखर अग्रवाल कौन हैं? IIT कानपुर से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने IAS तक का सफर कैसे तय किया? और 40 विला-कॉटेज की खरीद का पूरा मामला क्या है?
IIT कानपुर से IAS तक का सफर
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचे. IAS बनने के बाद उन्होंने राजस्थान में कई अहम पदों पर काम किया. उनके प्रशासनिक करियर में जिला स्तर की जिम्मेदारियों से लेकर राज्य सरकार के बड़े विभागों तक का सफर शामिल रहा.
शिखर अग्रवाल ने राजस्व, जल संसाधन, जनजातीय क्षेत्र विकास और वन एवं पर्यावरण जैसे विभागों में जिम्मेदारी संभाली. समय के साथ वह राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हो गए. फरवरी 2024 में उन्हें मुख्यमंत्री का अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया. बाद में उद्योग, निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग भी उनके जिम्मे रहे.
राजस्थान सरकार में कौन-कौन से विभाग संभाल रहे थे?
APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल अतिरिक्त मुख्य सचिव यानी ACS के पद पर तैनात थे. उनके पास उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME, सरकारी उपक्रम और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी थी. इसके अलावा निवेश और प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में भी उनकी भूमिका थी. राज्य में नए उद्योग लाने, निवेश को बढ़ावा देने और औद्योगिक विकास से जुड़े फैसलों के लिहाज से ये अहम विभाग माने जाते हैं. यानी एक तरफ उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव था, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां. अब वह APO किए जाने के बाद चर्चा में हैं.
ढाई साल में 40 विला-कॉटेज की खरीद
अब उस संपत्ति की कहानी समझते हैं, जिसको लेकर सवाल उठ रहे हैं. शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के दूसरे सदस्यों ने करीब ढाई साल में उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट में कुल 40 विला-कॉटेज खरीदे. ये संपत्तियां गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गईं.
सभी की कुल कीमत 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है. इनमें पहली खरीद उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में हुई. यहां 20 कॉटेज की रजिस्ट्री 29 सितंबर 2023 को कराई गई. इसके बाद दूसरी खरीद अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में हुई. यहां 20 विला की रजिस्ट्री 27 मार्च 2026 को कराई गई. इस तरह सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच परिवार ने दोनों जगह मिलाकर 40 संपत्तियां खरीदीं.
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इस मामले में खरीद के साथ हुए लीज समझौतों पर भी ध्यान गया है. परिवार ने संपत्तियां खरीदने के बाद उन्हें बेचने वाली कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को ही लीज पर देने के दस्तावेज रजिस्टर्ड कराए. दोनों जगह की संपत्तियों के लिए अलग-अलग सालाना लीज राशि तय होने की जानकारी सामने आई है.
उदयपुर के बुझड़ा स्थित 20 कॉटेज में से हर एक के लिए सालाना 4 लाख रुपये लीज राशि तय बताई गई. इस हिसाब से 20 कॉटेज से हर साल 80 लाख रुपये मिलने थे. वहीं, अलवर के अजबगढ़ स्थित 20 विला में से हर एक के लिए सालाना 5 लाख रुपये की लीज राशि तय बताई गई. इस हिसाब से इनसे हर साल 1 करोड़ रुपये मिलते. दोनों रकम को जोड़ें तो सालाना लीज राशि 1 करोड़ 80 लाख रुपये बनती है. यानी रिपोर्ट में बताए गए दस्तावेजों के मुताबिक, करीब 6.16 करोड़ रुपये की खरीद के बाद संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर देने का समझौता हुआ, जिससे इन्हें खरीदा गया था. इसी खरीद और लीज के पूरे मामले ने अधिकारियों की संपत्ति को लेकर चर्चा तेज कर दी.
पत्नी IPS अधिकारी, परिवार के सदस्यों के नाम पर भी संपत्तियां
शिखर अग्रवाल की पत्नी प्रशाखा माथुर भी वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS की अधिकारी हैं और राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यानी ADG के पद पर तैनात रही हैं. 40 विला-कॉटेज की रजिस्ट्री शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और प्रशाखा के माता-पिता के नाम पर कराई गई. शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर कुल 28 विला-कॉटेज होने की बात कही गई है.
इस मामले में अधिकारियों की अचल संपत्ति की सालाना जानकारी यानी IPR को लेकर भी सवाल उठे हैं. शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल अपने IPR में 14 संपत्तियों की जानकारी दी थी. वहीं, प्रशाखा माथुर की ओर से 8 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में संपत्ति संबंधी जानकारी शून्य बताई गई थी.
यही वजह है कि संपत्तियों की रजिस्ट्री और अधिकारियों की ओर से घोषित जानकारी के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं. APO का पूरा नाम Awaiting Posting Orders है. आसान भाषा में कहें तो अधिकारी को फिलहाल किसी नई पोस्टिंग का इंतजार करना होता है. राजस्थान सरकार ने शिखर अग्रवाल को APO किया है. आदेश में इसका कारण प्रशासनिक बताया गया है. फिलहाल शिखर अग्रवाल APO हैं और 40 विला-कॉटेज की खरीद का मामला चर्चा में बना हुआ है.
शरत कुमार