टाइगर फैमिली में गुड न्यूज... सरिस्का में बाघिन ST-17 ने तीन शावकों को दिया जन्म, फिर बढ़ा कुनबा

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर आई है. यहां बाघिन ST-17 ने तीन शावकों को जन्म दिया है. अकबरपुर रेंज एरिया में कैमरा ट्रैप और वन विभाग की गश्त के दौरान बाघिन अपने शावकों के साथ दिखाई दी. शावकों के जन्म के बाद सरिस्का में बाघों की संख्या और बढ़ गई है.

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सरिस्का में बढ़ा बाघों का कुनबा. (Photo: Screengrab) सरिस्का में बढ़ा बाघों का कुनबा. (Photo: Screengrab)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. यहां बाघिन ST-17 ने तीन शावकों को जन्म दिया है, जिससे सरिस्का में बाघों की संख्या में और बढ़ोतरी हुई है. वन विभाग की कैमरा ट्रैप निगरानी और गश्त के दौरान बाघिन को अपने तीनों शावकों के साथ घूमते हुए देखा गया है. शुरुआती जांच में बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियां सामान्य और स्वस्थ पाई गई हैं.

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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बाघिन ST-17 का दूसरी बार प्रजनन है. इससे पहले भी वह शावकों को जन्म दे चुकी है. शावकों के जन्म के बाद सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़ गया है.

यह शावक अकबरपुर रेंज एरिया में देखे गए हैं. यहां लगाए गए कैमरा ट्रैप में बाघिन अपने तीनों शावकों के साथ नजर आई है. इसके बाद वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और लगातार शावकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरिस्का में पिछले कुछ वर्षों से बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में यहां बाघों की संख्या 52 से अधिक हो चुकी है. बढ़ती संख्या के कारण सरिस्का में आने वाले पर्यटकों को भी बाघों की बेहतर साइटिंग हो रही है. इससे पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आई है और हर साल यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है.

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यह भी पढ़ें: पहली बार... वायुसेना के MI-17 हेलीकॉप्टर से बाघिन की शिफ्टिंग; पेंच से राजस्थान भेजी गई

सरिस्का टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक, बाघों की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम तैनात की गई है, जो 24 घंटे इलाके में नजर रख रही है. कैमरा ट्रैप, गश्त और अन्य तकनीकी माध्यमों से शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है.

दरअसल, सरिस्का का यह सफर आसान नहीं रहा है. वर्ष 2004-05 में अवैध शिकार के कारण यहां से बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे. उस समय यह देश के लिए एक बड़ा झटका माना गया था. इसके बाद सरकार और वन विभाग ने यहां बाघों को फिर से बसाने की योजना बनाई.

2008 में रणथंभौर से की गई थी शिफ्टिंग

साल 2008 में रणथंभौर नेशनल पार्क से बाघों को लाकर सरिस्का में भेजा गया. इसके बाद से यहां बाघों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इन प्रयासों का ही परिणाम है कि आज सरिस्का में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए शावकों के जन्म से संरक्षण कार्यक्रम को और मजबूती मिली है. आने वाले वर्षों में यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे तो सरिस्का में बाघों की संख्या और बढ़ सकती है.

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वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी टाइगर रिजर्व में शावकों का जन्म होना वहां के पारिस्थितिक तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत माना जाता है. सरिस्का में बाघिन ST-17 द्वारा तीन शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि यहां का जंगल बाघों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है.

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