25-25 लाख में खरीदे सर्टिफिकेट; SOG ने 3 और डॉक्टरों को किया गिरफ्तार, संख्या हुई 28

Rajasthan News: राजस्थान SOG ने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए डॉक्टर बनने वाले 3 और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को गिरफ्तार किया है. इस घोटाले में अब तक पूर्व रजिस्ट्रार सहित 28 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. पूरी रिपोर्ट...

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राजस्थान में 'मुन्नाभाई MBBS' का बड़ा खुलासा. (Photo: Representational) राजस्थान में 'मुन्नाभाई MBBS' का बड़ा खुलासा. (Photo: Representational)

शरत कुमार

  • जयपुर,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:36 PM IST

राजस्थान में फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट के जरिए डॉक्टर बनने के खेल में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने एक बार फिर बड़ा खुलासा किया है. विदेश से MBBS करने के बावजूद अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है.

आरोप है कि इन्होंने 20 से 25 लाख रुपये खर्च कर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट बनवाए, राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी कर ली.

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के भारत में पंजीयन के लिए अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा के फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले की जांच जारी है.

जांच के तहत ही इस मामले में नवदीप तम्बोलिया, चिराग साहु और आफरीदी खान को गिरफ्तार किया है. तीनों विदेश से एमबीबीएस कर भारत लौटे थे, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद एफएमजी परीक्षा पास नहीं कर सके.

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इसके बाद इन्होंने कथित तौर पर दलालों और पहले से गिरफ्तार आरोपियों के जरिए 23.5 से 25 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट बनवाए और उसी आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल कर ली.

जांच के मुताबिक मुख्य आरोपी भानाराम माली, उसके सहयोगी शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर विदेश से लौटे मेडिकल ग्रेजुएट्स को फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते थे.

इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने की पूरी व्यवस्था भी कराई जाती थी. इसके बदले प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये वसूले जाते थे.

एसओजी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा, पैसिफिक मेडिकल कॉलेज उदयपुर और राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप भी पूरी की.

इससे पूरे मेडिकल सिस्टम की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 4 जुलाई 2026 तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है. एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था, कितने फर्जी सर्टिफिकेट जारी हुए और किन-किन लोगों ने इस पूरे खेल से फायदा उठाया. एसओजी की कार्रवाई के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अब 28 तक पहुंच गई है.

इससे पहले 17 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट डॉक्टर, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है. 

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