राजस्थान के न्यायिक इतिहास में पहली बार: ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों ने परिवार के सामने लिए सात फेरे

जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल में पहली बार उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदी, मूलाराम और सीमा, विवाह बंधन में बंध गए. राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद ओपन जेल परिसर में यह ऐतिहासिक विवाह संपन्न हुआ. समारोह में दोनों परिवारों के 21 सदस्य शामिल हुए. इस आयोजन को जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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ओपन जेल में पहली बार दो उम्रकैद बंदियों का हुआ विवाह. (Photo: Screengrab) ओपन जेल में पहली बार दो उम्रकैद बंदियों का हुआ विवाह. (Photo: Screengrab)

अशोक शर्मा

  • जोधपुर ,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

राजस्थान के न्यायिक और जेल सुधार के इतिहास में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया. जोधपुर स्थित मंडोर खुला बंदी शिविर यानी ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदी, मूलाराम और सीमा, विवाह बंधन में बंध गए. राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ से विशेष अनुमति मिलने के बाद ओपन जेल परिसर में यह ऐतिहासिक विवाह संपन्न हुआ. राजस्थान के इतिहास में यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब किसी ओपन जेल परिसर के भीतर दो दोषी बंदियों का विवाह कराया गया. विवाह समारोह ओपन जेल परिसर में स्थित उनके क्वार्टर पर आयोजित किया गया. अदालत के आदेश के अनुसार दोनों पक्षों के कुल 21 पारिवारिक सदस्यों को समारोह में शामिल होने की अनुमति दी गई थी. शादी का पूरा खर्च और सभी व्यवस्थाएं दोनों बंदियों के परिवारों ने कीं.

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ओपन जेल के प्रहरी हापू राम ने बताया कि खुले बंदी शिविर में केवल अच्छे आचरण वाले बंदियों को ही रखा जाता है. मूलाराम और सीमा पिछले करीब डेढ़ वर्ष से मंडोर ओपन जेल में रह रहे हैं. इस दौरान दोनों का आचरण अच्छा रहा, जिसके आधार पर उन्हें ओपन जेल की सुविधा मिली. उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार विवाह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया. विवाह के बाद मूलाराम ने खुशी जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट से शादी की अनुमति मिलने पर वह बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि उनके अधिवक्ता कालूराम भाटी ने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग किया.

हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद मंडोर ओपन जेल में हुआ ऐतिहासिक विवाह

मूलाराम ने कहा कि वह शादी के बाद अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहते हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ लौटना चाहते हैं. मूलाराम ने बताया कि ओपन जेल में रहते हुए उन्होंने कृषि कार्य, ट्रैक्टर चलाना, उन्नत बीज उत्पादन और डॉक्टरों की देखरेख में अनुसंधान से जुड़े कई काम सीखे हैं. उनका कहना है कि सजा पूरी होने के बाद वह एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के नियमों के तहत ओपन जेल में रहने वाले बंदियों को काम के बदले पारिश्रमिक भी दिया जाता है. हर सुबह करीब 8 बजे फार्म मैनेजर काम का वितरण करते हैं और शाम को जेल विभाग के कर्मचारी बंदियों की उपस्थिति दर्ज करते हैं.

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21 परिजनों की मौजूदगी में मूलाराम और सीमा ने लिए सात फेरे

मंडोर ओपन जेल में संपन्न यह विवाह केवल दो लोगों के जीवन की नई शुरुआत नहीं है, बल्कि सुधारात्मक न्याय प्रणाली की भी एक अनूठी मिसाल माना जा रहा है. यह आयोजन इस बात का संदेश देता है कि अपराध की सजा काट रहे बंदियों को यदि सुधार का अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो वे भी समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं. राजस्थान की ओपन जेल व्यवस्था लंबे समय से सुधार और पुनर्वास के मॉडल के रूप में देखी जाती रही है. ऐसे में दो बंदियों का जेल परिसर में विवाह इस व्यवस्था की मानवीय सोच को भी सामने लाता है.

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