जयपुर में मिलावटखोरों पर बड़ी कार्रवाई, 35 हजार लीटर घी जब्त, फैक्ट्री सील

जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के शक में करीब 35,000 लीटर घी जब्त कर हिमालय डेयरी प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग फैक्ट्री सील कर दी. यहां सात अलग-अलग ब्रांड के नाम से घी पैक किया जा रहा था.

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जयपुर में मिलावट के शक में 35,000 लीटर घी जब्त कर फैक्ट्री सील की गई.(Representative Image) जयपुर में मिलावट के शक में 35,000 लीटर घी जब्त कर फैक्ट्री सील की गई.(Representative Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST

जयपुर में फूड सिक्योरिटी विभाग की टीम ने मंगलवार को मिलावट के शक में करीब 35 हजार लीटर घी जब्त किया. टीम ने एक मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग फैक्ट्री को भी सील कर दिया. यह कार्रवाई राज्य सरकार के ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की गई.

खाद्य सुरक्षा टीम ने हिमालय डेयरी प्रोडक्ट्स की फैक्ट्री का निरीक्षण किया. जांच के दौरान अधिकारियों को वहां सात अलग-अलग ब्रांड के नाम से घी पैक होता मिला. इनमें राजस्थान सरस, डेयरी ब्रदर्स, श्री किरण सरस, मतुला, चॉइस डेयरी, रघु श्री और गणक शामिल हैं.

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अधिकारियों के मुताबिक, घी 200 मिलीलीटर से लेकर 15 लीटर तक के पैकेट में रखा गया था. इसके अलावा बड़ी मात्रा में घी बड़े स्टोरेज साइलो में भी रखा हुआ था. जांच के दौरान फैक्ट्री से एक संदिग्ध फ्लेवरिंग पदार्थ भी मिला. अधिकारियों के अनुसार, इसे सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के लेबल के नीचे छिपाकर रखा गया था.खाद्य सुरक्षा विभाग ने घी और संदिग्ध फ्लेवरिंग पदार्थ के सैंपल लिए हैं. इन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है. अब यह पता लगाया जा रहा है कि घी में किसी तरह के आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट का इस्तेमाल किया गया था या नहीं और इसमें मिलावट हुई थी या नहीं.

फैक्ट्री में नहीं दिखा फूड लाइसेंस

निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर में फूड लाइसेंस भी प्रदर्शित नहीं किया गया था. संदिग्ध अनियमितताएं मिलने के बाद अधिकारियों ने पूरी फैक्ट्री को सील कर दिया. इसमें मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट दोनों शामिल हैं.वहीं, मंगलवार सुबह खाद्य सुरक्षा टीमों ने जिले के मोरिजा और चीथवाड़ी इलाकों में चार डेयरी और मावा बनाने वाली यूनिट्स की भी जांच की. टीम ने शकर दुला मावा पनीर भंडार, एके.डी. एंटरप्राइजेज और एस.डी.एस. मावा पनीर का निरीक्षण किया. यहां से दूध और मावा के सैंपल लेकर उन्हें भी जांच के लिए लैब भेजा गया है.

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