राजस्थान: सरकारी स्कूल में टॉयलेट की दीवार गिरने से सात साल की बच्ची की मौत, तीन शिक्षक निलंबित

राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूल में टॉयलेट की दीवार गिरने से सात साल की एक मासूम की मौत हो गई. घटना उस वक्त हुई जब बच्ची टॉयलेट के लिए गई थी. अचानक दीवार गिरने से वो घायल हो गई जिसके बाद उसे अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. शिक्षा विभाग ने स्कूल के तीन शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया है.

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यह एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है यह एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है

aajtak.in

  • कोटा,
  • 01 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:22 PM IST

राजस्थान के कोटा में एक सरकारी स्कूल में शौचालय की जर्जर दीवार गिरने से सात साल की बच्ची की मौत हो गई. घटना के बाद जिला शिक्षा विभाग ने स्कूल के तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मृतक बच्ची रोहिणी पहली कक्षा की छात्रा थी, कोटा जिले के दरबेची गांव स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थी. शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे जब वह टॉयलेट गई, तभी उसकी जर्जर दीवार गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई.

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अस्पताल में बच्ची ने तोड़ा दम

स्कूल स्टाफ ने बच्ची के माता-पिता को सूचना दी, जिसके बाद उसे तुरंत सुल्तानपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे कोटा के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार शाम को उसकी मौत हो गई.

स्कूल के तीन टीचर सस्पेंड

घटना की सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी के.के. शर्मा ने मामले की जांच के लिए प्राथमिक और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की एक संयुक्त टीम भेजी. जांच में स्कूल के तीन शिक्षक - अशोक कुमार पोरवाल, रामदयाल मेघवाल और गायत्री कंवर - की लापरवाही सामने आई, जिसके चलते उन्हें निलंबित कर दिया गया.

घटना के बाद पीड़ित परिवार और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. परिजनों ने स्कूल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है.

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ग्रामीणों ने दरबेची रोड पर प्रदर्शन कर बच्ची के परिवार को मुआवजा देने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की. प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार को 5.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आश्वासन दिया, जिसमें से 3.50 लाख रुपये तुरंत सौंपे गए. इसके बाद लोग सड़क से हटने के लिए तैयार हुए.


 

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