मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर देश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं. संसद द्वारा पारित कानून के तहत चुनाव आयुक्त की चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया गया है. अब इस समिति में प्रधानमंत्री, उनके द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं. विपक्षी दलों और विश्लेषकों का आरोप है कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ती है, क्योंकि इसमें सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होता है. सवाल है क्या लोकतांत्रिक ढांचे में जनादेश बड़ा है या जन आंदोलन? देखें राउंडटेबल.