लोकतंत्र में कभी- कभी कुछ आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं होते,वो समाज की चुप्पी को आवाज देते हैं. आज जो आंकड़े हमारे पास आए हैं... वो सिर्फ एक सर्वे नहीं हैं बल्कि देश के राजनीतिक मानस की धड़कन हैं... और ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं. टीएमसी में टूट और शिवसेना यूबीटी में बगावत के बीच सवाल ये कि देश क्या सोच रहा है? ... जनता दल-बदल को कैसे देख रही है? देखें PSE.