ऋतब्रत बनर्जी और एकनाथ शिंदे की राजनीति में कई बातें कॉमन हैं. सबसे बड़ी बात है, दोनों की ताकत के सोर्स का कॉमन होना. महाराष्ट्र में बगावत की दूसरी कवायद चार साल बाद चल रही है. महाराष्ट्र के चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' के पीछे एकनाथ शिंदे के लोगों का ही हाथ बताया जा रहा है. यह नया टास्क है, अधूरे काम पूरे करने का.
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने भी स्थानीय निकायों पर उद्धव ठाकरे की जगह काबिज होने की कोशिश की थी. बीएमसी पर भी नजर थी, लेकिन मनमाफिक कामयाबी नहीं मिल पाई. लेकिन, ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस में हर लेवल पर कब्जा जमाना चाहते हैं. ऋतब्रत बनर्जी सब कुछ एक बार में ही हासिल कर लेना चाहते हैं, एकनाथ शिंदे की तरह आगे के लिए कुछ नहीं छोड़ना चाहते. फिलहाल, दिल्ली से खुद को थोड़ा अलग रखे हुए हैं, लेकिन विधानसभा के बाद नगर निगमों और जिला परिषदों पर काबिज होने की कोशिश चल रही है.
कोलकाता पोर्ट से तृणमूल कांग्रेस विधायक और पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने भी विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि एक और विधायक उनकी टीम में शामिल हो गया है, और अब उनको 65 विधायकों का सपोर्ट हासिल हो चुका है.
ऋतब्रत का दावा, 'अब तक 65'
कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम विधानसभा पहुंचे तो उनकी मुलाकात तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष से हुई. फिरहाद हकीम मुख्यमंत्री शुभेंदु बनर्जी की कोलकाता नगर निगम में हुई बैठक में शामिल होने के बाद विधानसभा पहुंचे थे. फिरहाद हकीम के साथ बागी गुट के संदीपन साहा भी थे. संदीपन साहा के साथ फिरहाद हकीम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के केबिन में गए, जहां कई बागी विधायक पहले से मौजूद थे.
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने बताया, आज एक और विधायक ने हमारे समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं. अब हमारी संख्या 65 हो गई है. स्पीकर को भी पत्र सौंप दिया गया है. विधायकों के साथ बैठक में फिरहाद हकीम की मौजूदगी का जिक्र करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, वह मेरे अभिभावक की तरह हैं. हालांकि, ऋतब्रत बनर्जी ने यह साफ नहीं किया कि जिस नए साथी ने बागी विधायकों के सपोर्ट में दस्तखत किया है, वह फिरहाद हकीम ही हैं, या कोई और?
तैयारी बहुत दूर की लगती है
ऋतब्रत बनर्जी के मुताबिक, बागी विधायकों की तादाद 67-68 तक पहुंच सकती है. विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक चुनकर आए थे. ऋतब्रत बनर्जी ने सबसे पहले 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर रथिंद्र बोस को सौंपा था, जिसके बाद उनको विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिल गई थी. बाद में, बताते हैं, तीन अन्य विधायकों ने अलग अलग समर्थन पत्र दिए हैं. कुछ और विधायकों की ओर से भी ऐसे समर्थन पत्र सौंपे जाने का दावा किया जा रहा है.
यह पूछे जाने पर कि क्या बागी गुट खुद को असली टीएमसी होने का दावा करेगा, ऋतब्रत बनर्जी कहते हैं, हम ही टीएमसी हैं. असली और नकली का सवाल ही क्या है? दो-तिहाई से ज्यादा सांसद हमारे साथ हैं, दो-तिहाई से ज्यादा विधायक हमारे साथ हैं. अगर जरूरत पड़ी तो हम चुनाव आयोग जाएंगे.
ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस का जमीनी संगठन मीटिंग करेगा, फिर हम तय कर रहे हैं कि आगे क्या करना है. हमारी पहली प्राथमिकता विधायक थे, फिर सांसद, और उसके बाद धीरे-धीरे हम नगर निगमों, नगरपालिकाओं और फिर जिला परिषदों की जिम्मेदारी संभालेंगे.
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी का कहना था, सांसदों और विधायकों का मामला पूरा होने के बाद नगर निकायों में बदलाव शुरू होगा. नगरपालिकाएं, नगर निगम, जिला परिषद, यहां तक कि अलग-अलग जिलों के अध्यक्ष भी पहले से ही हमारे संपर्क में हैं. यह संसदीय लोकतंत्र है और इसमें संख्या का बहुत महत्व होता है... खैर, अब चुनाव आयोग में मुलाकात होगी.
क्या सांसदों और विधायकों के रास्ते अलग हैं
ऋतब्रत बनर्जी की बातों से ही लगता है, तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद अलग अलग दिशा में राजनीति करते देखने को मिल सकते हैं. कोलकाता में अलग, और दिल्ली में अलग. ऋतब्रत बनर्जी का कहना है, टीएमसी के बागी विधायकों का ग्रुप पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभाएगा, जबकि दिल्ली में बागी सांसद लोकसभा में एनडीए के साथ रहेंगे.
ऋतब्रत बनर्जी का कहना है, सांसद दिल्ली में हैं. जब वे लौटेंगे तो बैठकर बात करने की कोशिश होगी... मैं यह नहीं कह सकता कि कल या परसों क्या होगा, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि जिस तरह डर फैलता है, उसी तरह हिम्मत भी फैलती है. हम बीजेपी का विरोध करेंगे, लेकिन अगर मेरे किसी सांसद सहयोगी ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया, तो यह राजनीतिक तौर 180 डिग्री अलग रुख हो सकता है, फिर भी मैं उन्हें बधाई दूंगा... यह तानाशाही के खिलाफ लड़ाई है, और लोकतंत्र के लिए लड़ाई है.
जहां तक विधायक दल का सवाल है, ऋतब्रत का कहना है, हम विधानसभा में एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. सदन विपक्ष का भी है. हम सरकार का मुकाबला करेंगे, लेकिन सरकार का मुकाबला करने का मतलब हर बात का विरोध करना नहीं है. अगर सरकार कोई अच्छा काम करती है, तो हम खुलकर सार्वजनिक रूप से कहेंगे कि यह अच्छा है.
मृगांक शेखर