TMC की टूट और टकराव... काकोली बनाम कल्याण की जंग ममता कब तक इग्नोर करेंगी?

तृणमूल कांग्रेस में काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से शिकायत कर कल्याण बनर्जी पर महिला विरोधी व्यवहार का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी से नाराज काकोली घोष टीएमसी में रहते हुए ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी. (Photo: PTI) तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

काकोली घोष दस्तीदार का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है. गुस्से की वजह पुरानी भी हो सकती है, लेकिन उभरा है उनको लोकसभा में चीफ व्हीप के पद से हटा देने के बाद. काकोली घोष को हटाकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के सीनियर सांसद कल्याण बनर्जी को चीफ व्हीप बना दिया है. 

तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकीं काकोली घोष ने अब कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. और, महज आरोप ही नहीं लगाया है. लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है. कल्याण बनर्जी पर काकोली घोष ने महिला विरोधी आचरण करने, और मौखिक दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. 

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कल्याण बनर्जी ने पलटवार करते हुए काकोली घोष के देर से शिकायत दर्ज कराने पर सवाल उठाया है - काकोली की शिकायत पर अब स्पीकर के कदम का इंतजार है. 

लोकसभा स्पीकर से शिकायत

बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी नेताओं को अलग अलग जिम्मेदारियां दी हैं. उसी क्रम में कल्याण बनर्जी को भी नई जिम्मेदारी मिली है. कल्याण बनर्जी को लोकसभा में टीएमसी का चीफ व्हीप बनाए जाने पर काकोली घोष दस्तीदार ने खुलकर नाराजगी जताई थी. सोशल मीडिया के जरिए काकोली घोष ने ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए उलाहना दिया था कि 1976 से दोनों परिचित हैं, और 1984 से कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं, और चार दशकों की वफादारी का उनको यह इनाम मिला है. 

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की चीफ व्हीप रह चुकीं काकोली घोष ने टीएमसी के ही सीनियर सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर काकोली घोष ने आरोप लगाया है कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा के भीतर कई बार उनके साथ मौखिक दुर्व्यवहार किया, और महिला विरोधी व्यवहार अपनाया.

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स्पीकर को लिखे पत्र में काकोली घोष कहती हैं, मैं आपसे अनुमति चाहती हूं कि मैं AITC के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ इंसाफ के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज करा सकूं, जिन्होंने लोकसभा के भीतर बार-बार मेरे साथ मौखिक दुर्व्यवहार किया है.

काकोली घोष का कहना है कि ऐसा व्यवहार सिर्फ उनके साथ ही नहीं हुआ, बल्कि कई महिला सांसदों के साथ भी उसी तरह का व्यवहार किया गया है. काकोली घोष ने इसे महिला विरोधी रवैया बताते हुए, ऐसे आचरण के लिए संबंधित सांसद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है. 

मौजूदा लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 29 सांसद हैं, और उनमें से 11 महिलाएं हैं. देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को देखें तो महिला सांसदों की संख्या के मामले में टीएमसी सबसे आगे हैं. काकोली घोष के चीफ व्हीप होने की एक वजह तो यह भी रही होगी. काकोली घोष अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की भी अध्यक्ष थीं, लेकिन अब तो वो टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं. 

काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर अन्य महिला सांसदों के साथ भी दुर्व्यवहार का इल्जाम लगाया है. आपको याद होगा कि पिछले साल जून में कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा में भी तीखी नोकझोंक हुई थी. महुआ मोइत्रा के बयान पर तब कल्याण बनर्जी ने कहा था, 'महुआ हनीमून से लौटकर मुझसे लड़ने लगी हैं! मुझ पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है… वो क्या हैं? 40 साल की शादी तोड़ दी, और 65 साल के आदमी से शादी कर ली... क्या उन्होंने उस महिला को चोट नहीं पहुंचाई? 

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महुआ मोइत्रा को संसद से बर्खास्त किए जाने का जिक्र करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा था, एक सांसद जिसे नैतिकता के उल्लंघन के लिए संसद से निष्कासित कर दिया गया, वो मुझे उपदेश दे रही है... वो सबसे ज्यादा महिला विरोधी हैं.

कल्याण बनर्जी का सवाल

महुआ मोइत्रा से झगड़े में कल्याण बनर्जी के बयान को अलग रखकर देखें तो काकोली घोष के आरोप पर सही दलील पेश की है. अदालतों में सवाल इस बात पर भी उठाया जाता है कि FIR दर्ज किए जाने में देर क्यों हुई. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आरोपी को संदेह का लाभ भी मिल जाता है. 

कल्याण बनर्जी का सवाल भी शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी पर ही है. कल्याण बनर्जी ने सोशल साइट X पर लिखा, अगर मैंने संसद सत्र के दौरान कोई अपमानजनक टिप्पणी की थी, तो उस वक्त यह मामला माननीय स्पीकर के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया? काकोली मैडम को शिकायत करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी है कि कथित घटना आखिर कब हुई? और उसी समय कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई गई?

लोकसभा में टीएमसी के चीफ व्हीप कल्याण बनर्जी लिखते हैं, बदलते राजनीतिक माहौल में अब ऐसा लगने लगा है कि तथाकथित 'अच्छे तृणमूल नेता' होड़ लगा रहे हैं कि कौन तृणमूल कांग्रेस पर ज्यादा आक्रामक हमला कर खुद को नैतिक रूप से श्रेष्ठ साबित कर सकता है.

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कल्याण बनर्जी अब क्रॉस एफआईआर की भी बात कर रहे हैं. कहते हैं, मैं भी माननीय स्पीकर को पत्र लिखूंगा... और सम्मानपूर्वक पूछूंगा कि आखिर उस व्यक्ति के खिलाफ नारदा भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन की मंजूरी अब तक क्यों नहीं दी गई, जिसे कैमरे पर पैसे लेते हुए देखा गया था, और जिसके खिलाफ सीबीआई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.

निशाने पर ममता बनर्जी 

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया हो, भले ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ नई सरकार की प्रशासनिक बैठक में शामिल हो रही हों, लेकिन अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है. काकोली घोष का व्यवहार काफी हद तक आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद रहीं स्वाति मालीवाल से मिलता जुलता है. 

काकोली घोष भी स्वाति मालीवाल की ही तरह नेतृत्व पर हमलावर हैं, लेकिन पार्टी में बनी हुई हैं. लगता है काकोली घोष भी स्वाति मालीवाल की तरह कोई फैसला लेने के लिए सही वक्त का इंतजार कर रही हों. स्वाति मालीवाल अब बीजेपी की सांसद हो गई हैं. स्वाति मालीवाल ने राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी. 

टीएमसी से इस्तीफा देते वक्त भी काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी के साथ साथ ममता बनर्जी को भी निशाना बनाया था. काकोली घोष ने कहा था, जब एक महिला सांसद के प्रति किसी अशिक्षित और अभद्र पार्टी सांसद के व्यवहार को रोका नहीं जा सकता, और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से सहयोग और सहानुभूति नहीं मिलती, तब किसी पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता. 

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ममता बनर्जी को टार्गेट करते हुए काकोली घोष ने कहा, नेतृत्व द्वारा कुछ नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने की कोशिशों से वह काफी आहत महसूस कर रही हैं. फलता विधानसभा सीट का नतीजा आने के बाद भी काकोली घोष ने तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के वीडियो मैसेज को रीपोस्ट करते हुए लिखा, 'बागडोर संभाले रहिए,' - शायद ये कटाक्ष था. 

काकोली घोष और 100 से ज्यादा पार्षदों के इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस में एक और इस्तीफा हुआ है. सीनियर नेता और पूर्व सांसद डॉ. शांतनु सेन ने टीएमसी के आधिकारिक प्रवक्ता पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया है. शांतनु सेन ने भी काकोली घोष की तरह भ्रष्टाचार और आरजी कर केस का जिक्र किया है. शांतनु सेन का कहना है, आरजी कर अस्पताल के बेहद संवेदनशील मामले और पार्टी के खिलाफ लगातार लग रहे भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों से आहत होकर यह कदम उठाया है. शांतनु सेन का कहना है, अब पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में वो अपनी भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं हैं.

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