स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal), दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हैं. 24 अप्रैल 2026 को, वह राघव चड्ढा और अशोक मित्तल सहित 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हो गईं.
DCW में शामिल होने से पहले, मालीवाल ने जन शिकायतों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में काम किया है. मालीवाल सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नेतृत्व वाले इंडियन अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के प्रमुख सदस्य रहीं हैं. 2015 में अरविंद केजरीवाल सरकार बनने के बाद मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
मालीवाल का जन्म 15 अक्टूबर 1984 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad, UP) में हुआ था (Swati Maliwal Born). उन्होंने एमिटी इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की है ओर फिर जेएसएस एकेडमी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन से सूचना प्रौद्योगिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की (Swati Maliwal Education). अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद स्वाति ने एमएनसी में नौकरी की. लोकिन उसे छोड़कर "परिवर्तन" नाम के एक एनजीओ में शामिल हो गई (Swati Maliwal Job).
स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता नवीन जयहिंद (Swati Maliwal Huband) से शादी की. फरवरी 2020 में उनका तलाक हो गया (Swati Maliwal Divorced).
मालीवाल ने जुलाई 2015 में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया. उस समय, वह आम आदमी पार्टी की नेता थीं. इस पद पर उनका कार्यकाल जुलाई 2018 में और तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया था. वह महिलाओं के लिए आयुक्त की भूमिका निभाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं (Swati Maliwal Career).
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, जिसमें राघव चड्ढा और संदीप पाठक भी शामिल हैं. राज्यसभा चेयरमैन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस बदलाव से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है.
आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा. राघव चड्ढा समेत AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया. ये ऐसा पहले अवसर नहीं है. इससे पहले भी केजरीवाल के वफादार कहे जाने वाले कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसे नेता भी AAP छोड़ चुके हैं. इसी घटनाक्रम पर देखें 'सो सॉरी' का ये मजेदार एपिसोड.
पंजाब में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हरभजन सिंह और अन्य नेताओं को केंद्रीय सुरक्षा दिए जाने का फैसला चर्चा में है. राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा हटाने के तुरंत बाद यह कदम उठाया गया है. विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के बीच केंद्र की यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है. इससे साफ है कि हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद हालात संवेदनशील बने हुए हैं और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है
अरविंद केजरीवाल जी ने अपने ही घर में मुझे एक गुंडे से बुरी तरह पिटवाया. जब मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई और शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, तो मुझे डराया-धमकाया गया. यह घटना बहुत दुखद और चिंताजनक है क्योंकि किसी को भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए. न्याय की मांग करना हमारा अधिकार है, लेकिन यहां मुझे इस अधिकार से वंचित किया गया.
मैंने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली है. वर्षों से मैं अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही थी, अपने घर और नौकरी को छोड़कर झुग्गियों में रहने लगी और हर आंदोलन में उनका साथ दियाय. लेकिन खेद की बात है कि उन्होंने अपने ही घर में मेरी ऐसी बुरी तरीके से पिटाई करवाई जो मुझे बहुत दुखी और आहत कर गई.
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने 25 अप्रैल को ऐलान करते हुए कहा कि वो भाजपा में शामिल हो गई हैं. आम आदमी पार्टी के साथ करीब दो दशक पुराना रिश्ता तोड़ते हुए मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जताया.
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर संसद में बोलने से रोकने का आरोप लगाया. मालीवाल ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए केजरीवाल को महिला विरोधी और भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया.
राघव चड्ढा ने प्रेस कांफ्रेंस में भारी मन से कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे बनाया गया था. उन्होंने अपनी स्थिति तय करते हुए कहा, "मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता की ओर बढ़ रहा हूं."
राघव चड्ढ़ा ने पार्टी के पद से हटाए जाने के महज 22 दिनों के भीतर ही आप की और केजरीवाल की नींव ही हिला दी है.राघव चड्ढा ने खुद तो पार्टी छोड़ी ही साथ ही अपने छह और साथियों के हाथों से झाड़ू ले ली है. राघव ने अपने तीन साथियों के साथ कमल का फूल भी पकड़ा लिया है.
कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी तोड़ दी है, और दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. लेकिन, अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा सरप्राइज दिया है संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने. संदीप तो आप विचारधारा और संगठन के पुराने आदमी थे. दूसरे, अशोक मित्तल को राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था.
राघव चड्ढा सहित कई राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी जॉइन करने का ऐलान किया है. दो-तिहाई सांसदों के बीजेपी में विलय के दावे से AAP में बड़ी टूट और अंदरूनी संकट गहरा गया है.
स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है और अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी है. मालीवाल ने पार्टी में भ्रष्टाचार, महिलाओं के उत्पीड़न और आदर्शों से भटकने की बात कही है.
दिल्ली शराब नीति से जुड़े केस में AAP नेता अरविंद केजरीवाल खुद हाई कोर्ट में पैरवी करने जा रहे हैं. अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी के मामलों में काफी फर्क है - राजनीतिक फायदा तो ममता बनर्जी को भी मिला, अरविंद केजरीवाल को भी मिल सकता है, लेकिन कानूनी तौर पर लेने के देने भी पड़ सकते हैं.
राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के स्कूलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की खराब हालत के कारण कई नए स्कूल बने हैं. इस वजह से शिक्षा अब एक निजी व्यवसाय बन गया है, जहां केवल आर्थिक स्थिति अच्छे परिवारों के लिए बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करती है. यह स्थिति शिक्षा की मूल भावना को प्रभावित कर रही है.
अरविंद केजरीवाल का ये कहना, 'मैं तो नहीं जा रहा हूं' उनके राज्यसभा न जाने की कोई गारंटी नहीं है. कोई बहुत बड़ी मजबूरी नहीं हुई तभी वो इरादे पर कायम रह सकते हैं. अगर केजरीवाल नहीं तो मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के बाद ही किसी और का नंबर आता है.
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बच्चों के घटते बचपन और उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी का बचपन गलियों और मैदानों से सिमटकर मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो गया है. मालीवाल ने एम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पिछले दस वर्षों में 5 से 19 वर्ष के बच्चों में मोटापे की दर दोगुनी हो गई है.
अरविंद केजरीवाल ने लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में संजीव अरोड़ा को मंत्री बनाए जाने का एलान करते हुए करीब करीब साफ कर दिया है कि उनका अगला राजनीतिक पड़ाव राज्यसभा हो सकता है. अभी तक ऐसे दावे बीजेपी और कांग्रेस नेता लगा रहे थे, और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता खारिज करते आ रहे थे.
अरविंद केजरीवाल के पंजाब में डेरा डाल देने की जो वजह आम आदमी पार्टी की तरफ से समझाई जा रही है, उसमें वक्फ बिल का कहीं कोई जिक्र नहीं है - लेकिन ये मुद्दा दिल्ली से उनके दूरी बना लेने का एक कारण तो लगता ही है.
अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी में बड़े नेताओं की जिम्मेदारी बदल दी है. मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज तो क्रमशः पंजाब और दिल्ली के मोर्चे पर सामने नजर आ रहे हैं, लेकिन राघव चड्ढा और संजय सिंह का रोल अब क्या होगा, समझना काफी मुश्किल हो रहा है. हालांकि, दोनों के पास एक एक पुरानी जिम्मेदारी है.
अरविंद केजरीवाल विपश्यना के लिए ऐसे समय पंजाब पहुंचे हैं, जब आम आदमी पार्टी पहले ही चौतरफा चुनौतियों से जूझ रही है, जिसमें सरकार और पार्टी दोनो को बचाये रखना भी शामिल है - किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है, और मुख्यमंत्री भगवंत मान सख्ती से पेश आ रहे हैं.
अगर केजरीवाल राज्यसभा जाना चाहते हैं तो किसी को क्या दिक्कत हो सकती है? अगर नहीं ही जाना है तो बात और है, ये भी तो हो सकता है कि ये सब मनीष सिसोदिया या किसी और के लिए हो रहा हो.