मध्य प्रदेश के उज्जैन से तकनीक के जरिए ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने एक ऐसे युवक को हिरासत में लिया है जो मोबाइल ऐप के जरिए सड़क पर चलते ई-रिक्शा को हैक कर अचानक बंद कर देता था. इसके बाद वह खुद ही तकनीकी एक्सपर्ट और मददगार बनकर लाचार चालकों के पास पहुंचता था और रिक्शा चालू करने के नाम पर 200 से 300 रुपये ऐंठ लेता था.
जानकारी के मुताबिक, यह घटनाएं ज्यादातर देर रात सुनसान इलाकों में होती थीं. जब ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता था, तो चालक घबरा जाता था. इसी दौरान कथित आरोपी और उसका साथी मददगार बनकर पहुंचते और कुछ ही मिनटों में वाहन चालू कर देने का दावा करते थे. इसके एवज में वे चालकों से पैसे ऐंठ लेते थे.
लगातार सामने आ रही ऐसी शिकायतों के बाद असंगठित ई-रिक्शा चालक-परिचालक संघ ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की. शिकायत मिलने पर एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और संबंधित थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मामले की जांच शुरू की.
जांच के दौरान नीलगंगा थाना पुलिस ने ग्राम नवली निवासी 18 वर्षीय रीतेश भानूपा को शक के आधार पर हिरासत में लिया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि क्या वास्तव में किसी मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा के सिस्टम को प्रभावित किया जा सकता है या नहीं. इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है. साथ ही शहरभर के सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि यदि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है तो उसका भी खुलासा किया जा सके.
पुलिस ने फिलहाल ई-रिक्शा चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पुलिस का कहना है कि यदि वाहन अचानक बंद हो जाए तो किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा कर उसे पैसे न दें. वाहन में तकनीकी खराबी आने पर केवल अधिकृत सर्विस सेंटर या कंपनी के तकनीशियन से ही संपर्क करें.
इसके अलावा पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति जबरन मदद की पेशकश कर पैसे मांगता है तो उसकी फोटो, वीडियो या वाहन का नंबर सुरक्षित रखें और तुरंत डायल 100/112, साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें.
रवीश पाल सिंह