मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की महिला पटवारी संध्या शर्मा इन दिनों अपने काम और मातृत्व के बीच तालमेल को लेकर चर्चा में हैं. वह अपने दो साल के बेटे को साथ लेकर गांवों में घर-घर पहुंच रही हैं और सरकारी जिम्मेदारी निभा रही हैं. उनकी तस्वीर और काम करने के तरीके की सराहना करते हुए शिवपुरी के कलेक्टर अर्पित वर्मा ने उन्हें शाबाशी दी है.
जिले के डोंगर हल्के में पदस्थ पटवारी संध्या शर्मा स्वामित्व योजना के काम के लिए गांवों में जा रही हैं. इस दौरान उनका दो साल का बेटा भी उनके साथ रहता है. एक ओर बच्चे की देखभाल और दूसरी ओर सरकारी काम की जिम्मेदारी के बीच वह अपना काम जारी रखे हुए हैं.
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने की तारीफ
शिवपुरी कलेक्टर आईएएस अर्पित वर्मा ने संध्या शर्मा के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने लिखा, ''एक ओर मां का वात्सल्य, दूसरी ओर जनसेवा का संकल्प!''
कलेक्टर ने कहा कि संध्या शर्मा गोद में दो साल के बच्चे और कंधों पर शासन की स्वामित्व योजना की जिम्मेदारी लेकर दोनों भूमिकाओं को समर्पण और सहजता से निभा रही हैं. उन्होंने पटवारी के जज्बे, समर्पण और मातृत्व को प्रेरणादायी बताते हुए उनकी सराहना की.
इस प्रशंसा के बाद संध्या शर्मा की कहानी चर्चा में आई है. यह उदाहरण कामकाजी महिलाओं की उन जिम्मेदारियों की ओर भी ध्यान दिलाता है, जिनमें नौकरी और छोटे बच्चों की देखभाल दोनों शामिल हैं.
क्या है मध्य प्रदेश की स्वामित्व योजना?
मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीन पर बने मकानों और प्लॉट से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करना है. पात्र लोगों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका अहम है. इसी काम के सिलसिले में शिवपुरी शहर में रहने वाली संध्या शर्मा को अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर जानकारी और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. उनके पति भी सरकारी नौकरी हैं. ऐसे में पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वह अपनी ड्यूटी निभा रही हैं.
अब तक 7 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां
उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 7 लाख 62 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं. अभियान के तहत 40 हजार से अधिक गांवों के लगभग 50 लाख परिवारों को निशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा देने का लक्ष्य बताया गया है. योजना के तहत रजिस्ट्री से ग्रामीणों को संपत्ति पर कानूनी अधिकार के दस्तावेज मिलने में मदद मिलती है. इससे बैंक लोन और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
डिजिटल माध्यमों से हो रहा रजिस्ट्रेशन
योजना के क्रियान्वयन के लिए 'सारा ऐप' और 'संपदा 2.0' जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है. इनके जरिए संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड के सुधार, रजिस्ट्रेशन और सत्यापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
प्रदेश के सभी 55 जिलों में रजिस्ट्री का काम जारी होने की जानकारी दी गई है. ऐसे में पटवारियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका योजना को गांवों तक पहुंचाने में अहम है.
मातृत्व और जनसेवा के बीच संतुलन की कहानी
संध्या शर्मा की कहानी केवल एक महिला कर्मचारी की ड्यूटी तक सीमित नहीं है. वह अपनी छोटे बेटे की देखभाल करते हुए सरकारी जिम्मेदारी भी निभा रही हैं. उनके इस प्रयास की IAS अफसर ने सराहना की है. गांवों में घर-घर जाकर काम करने के दौरान बच्चे को साथ रखना उनके लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी भी है. इसके बावजूद वह स्वामित्व योजना के काम में जुटी हैं. उनकी कहानी कामकाजी महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और परिवार समेत नौकरी के बीच संतुलन बनाने के प्रयासों को सामने लाती है.
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