दादा ने अंग्रेजों को दिए थे 35 हजार, 109 साल बाद पोतों ने मांगा पैसा, ब्रिटिश सरकार बोली- सबूत दिखाओ

सीहोर के रूठिया परिवार का दावा है कि उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने 1917 में ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था. 109 साल बाद परिवार ने ब्याज सहित रकम वापस लेने के लिए कानूनी नोटिस भेजा. ब्रिटिश सरकार की तरफ से जवाब आया और कर्ज से जुड़े दस्तावेज और परिवार की जानकारी मांगी गई है.

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रूठिया परिवार ने ब्रिटिश सरकार से मांगा अपना हक. (Photo: Screengrab) रूठिया परिवार ने ब्रिटिश सरकार से मांगा अपना हक. (Photo: Screengrab)

नवेद जाफरी

  • सीहोर ,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

अंग्रेजों की हुकूमत भारत से चली गई, देश आजाद हो गया, लेकिन सीहोर के रूठिया परिवार का दावा है कि ब्रिटिश सरकार पर उनका 109 साल पुराना कर्ज आज भी बाकी है. परिवार के मुताबिक, साल 1917 में उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने ब्रिटिश हुकूमत को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था. अब परिवार ने इतने पुराने कर्ज को वापस लेने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है. इस नोटिस के बाद ब्रिटिश सरकार की तरफ से जवाब भी आया है और कर्ज से जुड़े दस्तावेज तथा परिवार की जानकारी मांगी गई है.

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सीहोर निवासी विवेक रूठिया और उनके भाई विनय रूठिया ने इस मामले की जानकारी दी है. उनका दावा है कि उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने ब्रिटिश सरकार के शासनकाल में सरकार को 35 हजार रुपये की रकम कर्ज के तौर पर दी थी. परिवार के मुताबिक, यह रकम भोपाल रियासत में प्रशासनिक प्रबंध को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से दी गई थी.

परिवार का कहना है कि साल 1917 में जब ब्रिटिश हुकूमत का शासन था, तब यह रकम सरकार को दी गई थी. समय बीतता गया और भारत आजाद हो गया. ब्रिटिश हुकूमत भारत छोड़कर चली गई, लेकिन परिवार के मुताबिक उनके दादा की ओर से दी गई रकम वापस नहीं की गई.

ब्याज सहित रकम लौटाने की मांग

अब 109 साल बाद रूठिया परिवार ने इस पुराने कर्ज को वापस लेने की कोशिश शुरू की है. परिवार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजा है. इसमें 35 हजार रुपये की मूल रकम के साथ ब्याज सहित पैसा वापस करने की मांग की गई है. नोटिस भेजे जाने के बाद इस मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब ब्रिटिश सरकार की ओर से परिवार को जवाब मिला. विवेक रूठिया और विनय रूठिया के मुताबिक, उन्हें मेल और अन्य माध्यम से जवाब मिला है. जवाब में ब्रिटिश सरकार की ओर से कर्ज से जुड़े सभी दस्तावेज और परिवार की जानकारी मांगी गई है.

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दादा का कर्ज, पोतों ने उठाया हक का मुद्दा

परिवार के लिए यह जवाब महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका कहना है कि 109 साल पुराने इस मामले को लेकर अब ब्रिटिश सरकार की ओर से दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है. रूठिया परिवार अब अपने पास मौजूद पुराने रिकॉर्ड और इस मामले से जुड़ी जानकारी को एकत्रित करने में जुटेगा.

विवेक रूठिया और विनय रूठिया का कहना है कि उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये दिए थे. परिवार के मुताबिक, उस समय यह रकम भोपाल रियासत में प्रशासनिक प्रबंध को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से दी गई थी. उनका दावा है कि यह कर्ज आज तक वापस नहीं किया गया.

परिवार अब इस रकम को सिर्फ पुराने कर्ज के तौर पर नहीं, बल्कि अपना हक मानकर वापस लेने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है. परिवार का कहना है कि वह इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जुटाकर अपने अधिवक्ता के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को उपलब्ध कराएगा.

रूठिया परिवार के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार की ओर से मांगी गई जानकारी में कर्ज से जुड़े दस्तावेज और परिवार की जानकारी शामिल है. अब परिवार पुराने रिकॉर्ड को इकट्ठा करेगा और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को बढ़ाया जाएगा.

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इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस कर्ज की बात परिवार कर रहा है, वह करीब 109 साल पुराना है. वर्ष 1917 में दी गई 35 हजार रुपये की रकम को वापस लेने के लिए परिवार ने अब कानूनी रास्ता अपनाया है. परिवार की ओर से ब्याज सहित रकम लौटाने की मांग की गई है.

ब्रिटिश सरकार के जवाब के बाद बढ़ी उम्मीद

विवेक रूठिया और विनय रूठिया का कहना है कि उनका परिवार अपने दादा से जुड़ी इस रकम को वापस चाहता है. उनका कहना है कि यह सिर्फ परिवार के पैसे का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है. परिवार चाहता है कि इस मामले में सरकार भी आगे आए और उनकी मदद करे.

रूठिया परिवार का कहना है कि सरकार को इस मामले में मदद करनी चाहिए, ताकि 109 साल पुराने कर्ज से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. परिवार अब ब्रिटिश सरकार की ओर से मांगे गए दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है.

परिवार ने यह भी बताया कि अगर यह रकम वापस मिलती है, तो उसका इस्तेमाल अपने निजी काम के लिए नहीं किया जाएगा. रूठिया परिवार के मुताबिक, वापस मिलने वाली राशि को गरीब कन्याओं की शादी और जरूरतमंद लोगों की मदद में खर्च किया जाएगा.

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ब्रिटिश सरकार के जवाब के बाद बढ़ी उम्मीद

इस तरह सीहोर के रूठिया परिवार की ओर से ब्रिटिश सरकार से 109 साल पुराने कथित कर्ज की रकम वापस लेने की कोशिश अब कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गई है. परिवार का दावा है कि 1917 में उनके दादा सेठ जुम्मालाल रूठिया ने ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था. अब ब्रिटिश सरकार की ओर से जवाब मिलने के बाद परिवार पुराने दस्तावेज जुटाकर आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा.

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