पक्षियों की बीट से रुक जाती थी पूरे क्षेत्र की बिजली! MP ट्रांसको ने ढूंढ निकाला अनोखा उपाय, ट्रिपिंग दर घटकर हुई शून्य

MP Transco Bird Guard Installation Vindhya: MP ट्रांसको ने विंध्य क्षेत्र के बिजली टावरों पर लगाए बर्ड गार्ड और प्रिवेंटर, पक्षियों से होने वाली ट्रिपिंग हुई खत्म. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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MP के विंध्य में 2000 से अधिक टावरों पर लगे स्पेशल बर्ड गार्ड.(Photo:ITG) MP के विंध्य में 2000 से अधिक टावरों पर लगे स्पेशल बर्ड गार्ड.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • रीवा,
  • 11 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:27 PM IST

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पक्षियों की वजह से होने वाली बार-बार की बिजली कटौती और पावर ट्रिपिंग की समस्या का MP Transco यानी मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक बेहद प्रभावी और तकनीकी समाधान ढूंढ निकाला है. कंपनी ने रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली जिलों से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज लाइनों पर खास तौर से डिजाइन किए गए बर्ड गार्ड (Bird Guard) और पक्षियों की बीट (मल) से बचाने वाले प्रिवेंटर लगाए हैं, जिससे क्षेत्र में ट्रिपिंग की घटनाएं घटकर लगभग शून्य हो गई हैं.

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राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि यह कदम न केवल आम जनता को बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की रक्षा भी कर रहा है.

स्टडी के बाद लिया गया बड़ा फैसला

MP Transco (रीवा-सतना) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अमित कुमार और असिस्टेंट इंजीनियर अजय चौरसिया की टेक्निकल स्टडी के अनुसार, साल 2025-26 में रीवा और आसपास के इलाकों में पक्षियों की गतिविधियों के कारण करीब 20 बार मेजर ट्रिपिंग दर्ज की गई थी.

क्यों होती थी ट्रिपिंग? 

बाणसागर, रिहंद जलाशय, सोन व तमस नदी बेसिन और संजय डुबरी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों से गुजरने वाले बिजली के टावर पक्षियों के बैठने और घोंसला बनाने का पसंदीदा ठिकाना बन जाते हैं.

बीट (मल) बनी वजह

बारिश या अत्यधिक नमी के दौरान पक्षियों की बीट इंसुलेटर डिस्क पर जमा हो जाती है, जिससे इंसुलेटर की बिजली चालन क्षमता बढ़ जाती है और शॉर्ट सर्किट (फ्लैशओवर) होकर पूरी लाइन ट्रिप हो जाती है.

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कैसे काम करते हैं बर्ड गार्ड और प्रिवेंटर?

बर्ड गार्ड: इसे टावर के क्रॉस-आर्म के सिरों पर लगाया जाता है. इसकी विशेष बनावट के कारण पक्षी वहां बैठ या घोंसला नहीं बना पाते. यह व्यवस्था बंदरों को भी क्रॉस-आर्म तक जाने से रोकती है.

प्रिवेंटर: इसे डिस्क इंसुलेटर के ठीक ऊपर फिट किया जाता है. अगर कोई पक्षी ऊपर बैठकर बीट करता भी है, तो यह उपकरण उसे सीधे इंसुलेटर डिस्क पर गिरने से रोक लेता है, जिससे इंसुलेशन क्षमता प्रभावित नहीं होती.

बर्ड फ्लाइट डायवर्टर: संवेदनशील इलाकों में तारों पर डायवर्टर लगाए गए हैं, ताकि उड़ते हुए पक्षी तारों से न टकराएं.

विंध्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहा काम

इंजीनियारों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में, MP ट्रांसको ने पांच 220 kV ट्रांसमिशन लाइनों (जिनकी कुल लंबाई 133.68 km है) के 470 टावरों पर 210 गार्ड और 50 प्रिवेंटर लगाए हैं. उन्होंने बताया कि इसी तरह, 15 132 kV ट्रांसमिशन लाइनों (जिनकी कुल लंबाई 440 km है) के 1530 टावरों पर 1600 गार्ड और 150 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं.

इन उपायों का मकसद पक्षियों की वजह से होने वाली ट्रिपिंग को कम करना है, साथ ही पक्षियों को पावर लाइनों के संपर्क में आने से बचाना, उनकी मौत और चोटों को रोकना और क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना है.

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