लाइफ जैकेट पहने होते तो बच जातीं कई जिंदगियां... जबलपुर क्रूज हादसे में आखिर कहां हुई चूक?

जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में अब तक 9 मौतें हो चुकी हैं. इस हादसे से किसी तरह जान बचाकर निकले दिल्ली के प्रदीप कुमार का कहना है कि यात्रियों को पहनने के लिए लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. जब लहरें तेजी से उठीं तो लोगों ने चालक को रोका, लेकिन उसने बात नहीं मानी. सवाल है कि आखिर सुरक्षा के इंतजामों में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?

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पर्यटक ने कहा- पहनने को नहीं दी गई थी लाइफ जैकेट. (Photo: Screengrab) पर्यटक ने कहा- पहनने को नहीं दी गई थी लाइफ जैकेट. (Photo: Screengrab)

रवीश पाल सिंह

  • जबलपुर,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

नर्मदा की लहरें... तेज हवाएं, पानी में उफान... मौसम खतरे का संकेत दे रहा था. लेकिन बरगी डैम में क्रूज पर सवार पर्यटकों को क्या पता था कि कुछ ही मिनटों में उनका सैर-सपाटे का सफर जिंदगी और मौत की जंग में बदल जाएगा. जबलपुर के बरगी डैम में हुए इस दर्दनाक क्रूज हादसे ने झकझोर दिया है. 

कई परिवारों की खुशियां पलभर में उजड़ गईं. कई लोग हमेशा के लिए अपनों से बिछड़ गए. लेकिन इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है- क्या यह घटना टाली जा सकती थी? क्या कुछ सावधानियां कई जिंदगियां बचा सकती थीं?

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दिल्ली के प्रदीप कुमार इस हादसे में बाल-बाल बच गए. लेकिन उनकी पत्नी और चार साल का मासूम बेटा लापता हैं. उनकी कांपती आवाज और नम आंखें उस भयावह मंजर की गवाही देती हैं. प्रदीप बताते हैं कि क्रूज में सुरक्षा इंतजाम नाम की कोई चीज नहीं थी. दो क्रू मेंबर थे, लेकिन जब हालात बिगड़े तो उन्होंने यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया. किसी को लाइफ जैकेट पहनाई तक नहीं गई. इसी लापरवाही ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया.

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जब यात्रियों ने खुद बचाई अपनी जान

आमतौर पर किसी भी जलयान पर सवार होने से पहले यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाई जाती है. सुरक्षा निर्देश दिए जाते हैं. इमरजेंसी की स्थिति में क्या करना है, यह बताया जाता है. लेकिन बरगी डैम के इस क्रूज में क्या ऐसा कुछ हुआ?

प्रदीप के मुताबिक, यात्रियों ने खुद ही लाइफ जैकेट उठाईं और एक-दूसरे को दीं. सोचिए, जब पानी सिर के ऊपर चढ़ रहा हो, लोग चीख रहे हों और उसी वक्त आपको पहली बार समझ आए कि लाइफ जैकेट कहां है और कैसे पहननी है- तो हालात कितने भयावह होंगे.

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हादसे से पहले ही खतरे के संकेत मिलने लगे थे. तेज हवाएं चल रही थीं. लहरें ऊंची हो रही थीं. किनारे पर मौजूद लोगों ने भी चालक को चेताया था कि क्रूज को तुरंत किनारे लगा लिया जाए. लेकिन प्रदीप का आरोप है कि चालक ने किसी की नहीं सुनी. वह क्रूज को वापस शुरुआती प्वाइंट तक ले जाने की जिद पर अड़ा रहा. यही जिद कुछ ही देर में कई जिंदगियों पर भारी पड़ गई.

लाइफ जैकेट क्यों है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच?

पानी में डूबने से मौत अक्सर तैरना न आने के कारण नहीं होती, बल्कि घबराहट, थकान और पानी के तेज बहाव की वजह से होती है. लाइफ जैकेट शरीर को पानी के ऊपर बनाए रखती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, हादसे के पहले पांच मिनट सबसे अहम होते हैं. अगर उस वक्त व्यक्ति ने लाइफ जैकेट पहनी हो, तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

बरगी डैम हादसे में कई लोगों को तैरना नहीं आता था. कई छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी क्रूज पर सवार थे. ऐसे में लाइफ जैकेट उनकी पहली और सबसे मजबूत सुरक्षा हो सकती थी.

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क्या सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई थीं? क्या उन्हें पहनना जरूरी किया गया था? क्या क्रू मेंबर ने सुरक्षा ड्रिल कराई थी? खराब मौसम में क्रूज को रवाना क्यों किया गया? लोगों के टोकने के बावजूद चालक ने किनारा क्यों नहीं किया? ये सवाल सिर्फ जांच के लिए नहीं हैं. ये उन परिवारों की पुकार हैं, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है.

किसी ने अपने माता-पिता खोए, किसी ने बच्चे. किसी ने जीवनसाथी. दिल्ली के प्रदीप आज अस्पताल और रेस्क्यू कैंप के बीच भटक रहे हैं.  

क्रूज या बोट पर सवार होने के नियमों में किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट देना भी जरूरी है. मौसम खराब होने पर संचालन तुरंत रोकना चाहिए. लेकिन बरगी डैम में इन नियमों का कितना पालन हुआ, यह अब जांच का विषय है. अगर नियमों का सख्ती से पालन किया गया होता, तो शायद यह खबर आज लिखी ही नहीं जा रही होती.

हादसे के बाद पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों ने मोर्चा संभाला. कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया. लेकिन जो लापता हैं, उनके परिवारों के लिए हर मिनट पहाड़ बन चुका है. बरगी डैम के किनारे बैठी आंखें सिर्फ एक चमत्कार का इंतजार कर रही हैं. हर जल यात्रा रोमांचक होती है, लेकिन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है.

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लाइफ जैकेट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने के लिए बेहद अहम है. बरगी डैम की लहरों ने जो सवाल छोड़े हैं, उनका जवाब देना अब व्यवस्था की जिम्मेदारी है. क्योंकि अगली बार किसी क्रूज पर सवार होने वाला हर यात्री यह जानना चाहेगा कि उसकी सुरक्षा सिर्फ भगवान के भरोसे नहीं, बल्कि व्यवस्था के भरोसे भी है.

दरअसल, गुरुवार शाम जबलपुर के बरगी डैम में पर्यटकों से भरा क्रूज नर्मदा नदी के बैकवाटर में सैर कर रहा था, तभी मौसम अचानक बिगड़ गया. तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच क्रूज डगमगाया और डूबने लगा. इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 23 को बचाया गया है. लापता लोगों की तलाश में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों को लगाया गया था.

इस हादसे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा कि ⁠अगले आदेश तक प्रदेश के सभी क्रूज बंद रहेंगे. ⁠पर्यटन मंत्री ने सभी क्रूज की जांच करने और सुरक्षा इंतजाम की पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं. ⁠क्रूज के स्टाफ को आपातस्थिति की ट्रेनिंग दी जाएगी.

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