जहां मिला था भारत का पहला डायनासोर जीवाश्म, वहां बनेगा पहला वर्ल्डक्लास जियोलॉजिकल म्यूजियम; सरकार ने दी हरी झंडी

Jabalpur Bhedaghat Geological Park: भेड़ाघाट में बनेगा देश का पहला विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम. केंद्र सरकार ने 87 करोड़ की योजना को मंजूरी दे दी है. 18 महीने में होगा तैयार. आगे पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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जबलपुर के लम्हेटाघाट में आकार लेगा टाइटेनोसॉर स्क्वायर और फॉसिल गार्डन.(Photo:AI Generated) जबलपुर के लम्हेटाघाट में आकार लेगा टाइटेनोसॉर स्क्वायर और फॉसिल गार्डन.(Photo:AI Generated)

aajtak.in

  • जबलपुर,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

जबलपुर के वर्ल्ड फेमस भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट में देश का पहला वर्ल्डक्लास जियोलॉजिकल म्यूजियम बनाया जाएगा. इसके लिए 87 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है. यह प्रोजेक्ट स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. इससे पर्यटन विकास को नई गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.

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लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने 18 जनवरी 2024 को मंत्रालय में जियो पार्क की प्रोजेक्ट रिपोर्ट और डिजाइन का प्रजेंटेशन देखा था. उन्होंने प्रोजेक्ट के निर्माण को प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप रखने, संग्रहालय को आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने व लम्हेटा फॉर्मेशन, रानी दुर्गावती और जबलपुर की भू-संस्कृति को इसमें प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए थे. उन्होंने प्रकृति अनुभव आधारित पर्यटन, नेचर स्टे और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया था.

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डायनासोर पार्क से ट्री-टॉप वॉकवे तक

प्रोजेक्ट में करीब 5745 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है, जबकि 90 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र को हरित रखने का लक्ष्य रखा गया है. प्राकृतिक भू-दृश्य और मौजूदा पेड़ों को सुरक्षित रखते हुए संरचनाएं विकसित की जाएंगी. इसमें स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान और पर्यटन सेवाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर भी खास फोकस होगा.

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म्यूजियम में होंगी 6 गैलरी

इस प्रोजेक्ट के तहत वर्ल्ड क्लास जियोलॉजिकल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा. इसमें छह विषयगत गैलरियां और 130 से अधिक प्रदर्शनी शामिल होंगे.

इसके अलावा 3D मॉडलिंग, इंटरैक्टिव टच टेबल, डिजिटल पैनल और इमर्सिव थिएटर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. परिसर में टाइटेनोसॉर स्क्वायर, डायनासोर पार्क, फॉसिल गार्डन, जियोलॉजिकल मेज, रॉक गार्डन, ट्री-टॉप वॉकवे, ग्लास फ्लोर, नेचर वॉक और व्यूइंग डेक भी बनाए जाएंगे.

रेस्टोरेंट से लेकर ग्लैम्पिंग टेंट तक की सुविधा

परिसर में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप, स्थानीय उत्पादों के लिए रिटेल क्षेत्र और ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट भी प्रस्तावित है. इसके अलावा पार्किंग और टिकटिंग जैसी आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. संग्रहालय में बच्चों, विद्यार्थियों और भू-विज्ञान के शोधार्थियों के लिए अलग-अलग अनुभव आधारित सामग्री उपलब्ध होगी.

करोड़ों साल पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास की जानकारी

लम्हेटा फॉर्मेशन इस क्षेत्र की विशिष्ट भू-वैज्ञानिक पहचान है. इसी क्षेत्र में भारत का पहला डायनासोर जीवाश्म टाइटेनोसॉरस इंडिकस (Titanosaurus Indicus) मिला था.

संग्रहालय में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर मध्यप्रदेश और नर्मदा घाटी के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को सरल, रोचक और वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा. मध्यप्रदेश के 13 भौगोलिक क्षेत्रों की भू-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा.

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भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट के लिए प्राकृतिक श्रेणी में यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची के लिए नामांकन डोजियर प्रस्तुत किए जाने और भविष्य में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की संभावनाओं का भी परियोजना प्रस्ताव में उल्लेख है.

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा विस्तार

जियोलॉजिकल पार्क बनने से जबलपुर को इंटरनेशनल पर्यटन नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने की बात परियोजना में कही गई है. प्रोजेक्ट प्रस्ताव के अनुसार, साल 2025 में करीब 10.68 लाख पर्यटक भेड़ाघाट पहुंचे थे. इस प्रोजेक्ट के विकसित होने पर पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इससे होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलने की बात कही गई है.

भेड़ाघाट पहले से मार्बल रॉक्स, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर के कारण प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. जियो पार्क के निर्माण से प्राकृतिक पर्यटन के साथ ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन भी जुड़ जाएगा.

सितंबर 2026 से फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

इस प्रोजेक्ट की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड होगी. परियोजना को 18 माह में सितंबर 2026 से फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रोजेक्ट के लिए पर्यटन विभाग के स्वामित्व में करीब 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है.

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