MP News: डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने चूहे मारने की जहर खाने वाले एक युवक के इलाज के दौरान 'स्टमक पंपिंग' यानी पेट साफ करने की प्रक्रिया के लिए पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर का इस्तेमाल किया.
गैस्ट्रिक लैवेज, जिसे आम तौर पर 'स्टमक पंपिंग' कहा जाता है, इमरजेंसी के समय किया जाता है. इसमें गले के जरिए पेट में एक ट्यूब डाली जाती है और स्टराइल वॉटर या सलाइन से पेट को साफ किया जाता है.
इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया.
चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. मनोज पांडे ने कहा कि डॉक्टर को शो-कॉज़ नोटिस जारी किया गया है, लेकिन उन्होंने उन रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि मरीज को पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर नसों के जरिए (इंट्रावेनस) दिया गया था.
CMHO मनोज पांडे ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "नसों के जरिए कोई दवा या पानी नहीं दिया गया था."
डॉ. पांडे ने बताया कि जूनियर डॉक्टर ने मरीज के परिवार से पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर की एक बोतल लाने को कहा. हालांकि अस्पताल में गैस्ट्रिक लैवेज के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की अपनी सुविधा है, और फिर 'राइल ट्यूब' के जरिए उसे मरीज को दिया. देखें VIDEO:-
मरीज सत्यम यादव (18) को बुधवार दोपहर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था. आरोप है कि उसने चूहे मारने की जहर खा ली थी.
सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर ने एक नर्स से प्रक्रिया के दौरान पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतल इस्तेमाल करने को कहा था. जब नर्स ने आपत्ति जताई, तो उन्होंने खुद ही यह प्रक्रिया पूरी की.
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस घटना को लेकर BJP सरकार की आलोचना की. उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बिगड़ने का आरोप लगाया और जवाबदेही की मांग की.
डेविड सूर्या