'एक ही परिसर में दो तरह की दीवारें क्यों?', धार भोजशाला केस में विष्णु जैन की कोर्ट में दलील, सुनवाई का चौथा दिन

इंदौर हाई कोर्ट में धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. नियमित सुनवाई के चौथे दिन हिंदू पक्ष ने ASI की सर्वे रिपोर्ट के पन्ने दर पन्ने खोलकर कोर्ट में अपनी दावेदारी मजबूत की.

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हाई कोर्ट में भोजशाला विवाद पर छिड़ी कानूनी जंग.(File Photo:ITG) हाई कोर्ट में भोजशाला विवाद पर छिड़ी कानूनी जंग.(File Photo:ITG)

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

  • इंदौर,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:51 PM IST

MP News: इंदौर हाई कोर्ट में धार भोजशाला विवाद मामले की सुनवाई चौथे दिन भी जारी रही. सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार की ओर से अधिवक्ता विष्णु जैन ने भोजशाला को मंदिर साबित करने के लिए कई अहम तर्क कोर्ट के समक्ष रखे.

हिंदू पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला परिसर से जुड़े कई तथ्यों का हवाला दिया. अधिवक्ता विष्णु जैन ने कोर्ट को बताया कि सर्वे रिपोर्ट में ऐसे कई संकेत मिले हैं, जो इस स्थल के मंदिर स्वरूप की ओर इशारा करते हैं.

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सुनवाई के दौरान रिपोर्ट के अलग-अलग बिंदुओं को विस्तार से कोर्ट के सामने पेश किया गया. इनमें परिसर में मिली मूर्तियों, स्तंभों (पिलर), संस्कृत श्लोकों और अन्य स्थापत्य अवशेषों का उल्लेख किया गया.

हिंदू पक्ष ने यह भी दलील दी कि किसी मंदिर परिसर में दो अलग-अलग शैली और बनावट वाली दीवारों का होना कई ऐतिहासिक बदलावों की ओर संकेत करता है. वहीं, हिंदू पक्ष की इन दलीलों पर ASI ने आपत्ति दर्ज कराई.

ASI की ओर से कोर्ट से कहा गया कि फिलहाल उसकी सर्वे रिपोर्ट पर किसी अन्य पक्ष की ओर से तर्क पेश न किए जाएं. ASI ने स्पष्ट किया कि जब उसकी रिपोर्ट पर औपचारिक सुनवाई होगी, तब सभी पक्ष अपने-अपने तर्क विस्तार से रख सकेंगे.

आज की सुनवाई में हिंदू पक्षकार की ओर से दाखिल एक याचिका पर बहस पूरी हो गई. अब शुक्रवार से हिंदू पक्ष की दूसरी पिटीशन पर सुनवाई शुरू होगी, जिसमें मामले से जुड़े अन्य बिंदुओं पर दलीलें रखी जाएंगी.

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धार भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का मामला बना हुआ है, ऐसे में हाई कोर्ट की सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं.

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