Gen-Z की डिक्शनरी में एक शब्द काफी पॉपुलर है-Delulu. यानी ऐसी चीजों पर भी पूरा भरोसा रखना, जिनके सच होने की शायद अभी कोई गारंटी नहीं है और शायद उनका सच होने पॉसिबल भी नहीं है. सोशल मीडिया पर “Delulu is the Solulu” जैसे मीम्स और वीडियोज खूब देखने को मिलते हैं. लेकिन जब बात रिलेशनशिप्स की हो, तो क्या थोड़ा Delulu होना सच में काम आ सकता है?
मान लीजिए आपको कोई पसंद है. उसने आपकी स्टोरी देखी, आपके मैसेज का जवाब दिया या टॉकिंग स्टेज के दौरान आपकी थोड़ी ज्यादा केयर की. इतने जेशर्स के बाद हमारा दिमाग तुरंत ख्याली पुलाव पकाने लगता है- “शायद उसके मन में भी आपके लिए सेम फीलिंग्स है.” यही वह जगह है जहां Delulu (delusion) एंट्री लेता है. आप सामने वाले के छोटे-छोटे gestures को पॉजिटिव तरीके से देखना शुरू करते हैं और खुद को कंवेंस करते हैं कि चीजें आपके फेवर में जाएंगी.
इसका एक पार्ट ओवर-कॉन्फिडेंस भी है. अगर आपको लगता है कि आप प्यार और अच्छे रिश्ते के लायक हैं, तो आप किसी को पसंद करने या अपनी फीलिंग्स express करने में कम हेजीटेट करते हैं. यह confidence आपको rejection के डर से तो बाहर निकाल सकता है. लेकिन यहां एक लाइन समझना जरूरी है-कॉन्फिडेंस और रियालटी को ignore करना एक ही चीज नहीं हैं.
यहीं Manifestation का कॉन्सेप्ट भी आता है. सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी डिजायर्ड रिलेशनशिप को करने, उसके बारे में positive रहने और उसे अपनी reality मानने की बात करते हैं. इससे व्यक्ति अपने goals को लेकर focused और hopeful महसूस कर सकता है. लेकिन सिर्फ किसी व्यक्ति को लगातार manifest करने से उसकी feelings नहीं बदली जा सकतीं.
रिश्ते आखिरकार दो लोगों की चॉइज और एफर्ट से बनते हैं. आप पॉजिटिव रह सकते हैं, खुद पर भरोसा रख सकते हैं और अपने लिए अच्छे रिलेशनशिप को इमैजिन कर सकते हैं, लेकिन सामने वाले की चॉइज और boundaries को बदलना इज नॉट इन आर हैं.
इसलिए “Delulu is the Solulu” शायद पूरी तरह गलत फंडा नहीं है, अगर Delulu का मतलब खुद पर ट्रस्ट रखकर और possibilities के लिए open रहना है. लेकिन अगर यही Delulu सामने वाले के क्लियर साइन्स को ignore करने लगे, तो मैटर थोड़ा उल्टा पड़ सकता है.
शायद रिलेशनशिप में सही formula -थोड़ा Delulu, थोड़ा Reality Check का है.
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