इंडियन लाइफस्टाइल में बालों की देखभाल के लिए सिर में तेल लगाना काफी पुराना रूटीन है. यही वजह है कि भारत में हेयर ऑयल का बाजार हमेशा काफी अधिक होता है. रिसर्च के मुताबिक, भारतीय हर साल करीब 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का तेल अपने सिर में लगा जाते हैं. यह बाजार सिर्फ पारंपरिक तेलों तक सीमित नहीं है बल्कि अब इसमें कई नए ऑपशंस भी शामिल हो गए हैं. भारत में लोग बालों को मजबूत बनाने, असमय सफेद होने से रोकने और डैंड्रफ जैसी समस्याओं से निपटने के लिए जमकर हेयर ऑयल खरीद रहे हैं. अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारतीय किस तेल का सबसे अधिक इस्तेमाल करते हैं. तो आइए इस बारे में जान लीजिए.
कोकोनट ऑयल का मार्केट में आज भी है जलवा
मोर्डोर इंटेलिजेंस का साल 2025 का डेटा बताता है कि देश में हेयर ऑयल का मार्केट करीब 14,500 करोड़ रुपये (1.76 अरब डॉलर) से लेकर 16,100 करोड़ रुपये (1.94 अरब डॉलर) के आसपास है. आसान शब्दों में समझें तो भारत में हेयर ऑयल का मार्केट साइज करीब 15,000 करोड़ रुपये सालाना के स्तर पर पहुंच चुका है. इसका मतलब यह है कि भारतीय लोग अब हर साल औसतन 15,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का तेल खरीदकर सिर में लगा रहे हैं. आने वाले सालों में बाजार बढ़ने के साथ यह सालाना खर्च और भी ज्यादा हो जाएगा.
अब हेयर ऑयल मार्केट हर साल करीब 5 से 6 परसेंट की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. इसका मतलब यह है कि आने वाले सालों में भारतीयों का तेल पर होने वाला यह खर्च और भी ज्यादा बढ़ने वाला है.
कौन से तेल की सबसे अधिक मांग?
आंकड़ों से पता चलता है कि हेयर ऑयल मार्केट में सबसे अधिक मांग अब भी नारियल तेल की ही है क्योंकि भारत के कुल हेयर ऑयल मार्केट में अकेले कोकोनट ऑयल की हिस्सेदारी करीब 46 प्रतिशत से अधिक है. ग्रामीण इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक, हर वर्ग के लोग बालों को पोषण देने और नमी बनाए रखने के लिए नारियल तेल को अपनी पहली पसंद मानते हैं.
यानी कि भारत में हेयर ऑयल की सबसे ज्यादा मांग नारियल तेल की है लेकिन आने वाले समय में आयुर्वेदिक, ऑर्गेनिक और हल्के बालों के तेल में उछाल आ सकता है क्योंकि ग्राहकों को अब केवल तेल नहीं, बल्कि बेहतर रिजल्ट और उपयोग में आसान वाले तेल की जरूरत है.
नारियल तेल की इतनी डिमांड क्यों है?
मार्केट रिसर्च के अनुसार, भारत में हेयर ऑयल केटेगरी में कोकोनट ऑयल सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला तेल है, खासकर दक्षिण भारत में इसकी पकड़ बहुत मजबूत है. वजह साफ है, यह सस्ता, आसानी से मिलने वाला और पारंपरिक घरेलू प्रयोग से बना प्रोडक्ट है. वहीं, कुछ एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि युवाओं में अब चिपचिपे तेलों की जगह लाइटवेट और नॉन-स्टिकी ऑयल्स का क्रेज बढ़ रहा है.
आयुर्वेद और हर्बल तेलों की बढ़ी डिमांड
बदलती लाइफस्टाइल और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स के नुकसान को देखते हुए अब भारतीय कंज्यूमर्स का रुझान नेचुकल और आयुर्वेदिक तेलों की तरफ तेजी से बढ़ा है. रिसर्च एंड मार्केट्स की स्टडी का कहना है कि आंवला, भृंगराज, बादाम और कैस्टर ऑयल जैसे हर्बल तेलों की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है. लोग अब ऐसे तेलों पर ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं जो बालों का झड़ना कम करने और स्कैल्प को हेल्दी रखने का दावा करते हैं.
मृदुल राजपूत